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जम्मू कश्मीर: सेब व्यापारियों को डराने की कोशिश में आतंकी

घाटी में गैर स्थानीय सेब व्यापारियों और ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाने के बाद से जम्मू कश्मीर पुलिस हरकत में आई और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने से सेब व्यापार से जुड़े लोगों में खौफ न पैदा हो. 

जम्मू कश्मीर: सेब व्यापारियों को डराने की कोशिश में आतंकी

श्रीनगर: सबसे पहले 14 अक्टूबर की शाम को आतंकियों ने शोपियां जिले में राजस्थान के शरीफ खान नामक एक ट्रक ड्राइवर को मौत के घाट उतार दिया और उसका सेब से भरा ट्रक भी जला दिया गया. इसके बाद दूसरी घटना 16 अक्टूबर को ट्रेंज शोपियां में चरणजीत सिंह और संजय नामक दो सेब व्यापारियों को गोलियों से निशाना बनाया, जिसमें चरणजीत की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गया. उसका इलाज श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में चल रहा है.

घाटी में गैर स्थानीय सेब व्यापारियों और ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाने के बाद से जम्मू कश्मीर पुलिस हरकत में आई और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने से सेब व्यापार से जुड़े लोगों में खौफ न पैदा हो. लेकिन पुलिस के इस आश्वासन के बावजूद आतंकी गुरुवार देर रात को एक बार फिर से शोपियां ज़िले के चित्रगाम में ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाने में कामयाब रहे, जिसमें दो की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया. इसके चलते गैर स्थानीय ट्रक ड्राइवरों में एक बार फिर से दहशत का माहौल है.

इलियास नामक ट्रक ड्राइवर ने बताया, 'रात की जो घटना हुई है, जिसमें ट्रक ड्राइवरों को मारा गया और उसके ट्रक जलाए गए. उसके बाद से यहां से करीब 150 से अधिक ट्रक बिना माल भरे चले गए हैं. अगर यहां की फिजा खराब है तो हुमें यहां आने ही क्यों दिया जा रहा है. पहले ही कयों नहीं हमें रोक रहे हैं.' इलियास के अनुसार दहशत का माहौल है और हरेक यही चाह रहा है कि जल्द अपने मुकाम पर पहुंच जाऊं.

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जैसलमर राजस्थान के एक अन्य ट्रक चालक इरफान पठान ने बताया 'काफी खौफ है. हमारे गांव की भी 120 गाडियां वापस लौट गई हैं. हमारी सुरक्षा का ध्यान देना चाहिए काफी दिक्कत हो रही है. केवल हमारा नहीं यहां के व्यापारियों के माल का भी नुकसान हुआ है. हम यहां कमाने आए हैं और अगर यहां आने नहीं देंगे तो वहीं कमाना शुरू कर देंगे. अगर हम आएंगे ही नहीं तो कोई घटना भी नहीं घटेगी.' शोपियां ज़िले के ज़िला उपायुक्त यासीन चौधरी ने बताया कि ट्रक ड्राइवर को निशाना बनाने की तीर घटनाएं हो चुकी हैं.

16 अक्टूबर की घटना के बाद हमने एक सुरक्षा समीक्षा की थी, जिसके बाद सुरक्षित जोन बनाने का फ़ैसला लिया गया था, लेकिन र्दुभाग्यवश कुछ ट्रक वहां से अंदरूनी इलाकों में भी जा रहे हैं. गुरुवार का जो हादसा हुआ है वह भी अंदरूनी इलाके में शोपियां और कुलगाम ज़िले के बार्डर के पास हुआ है. 

उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर की घटना के बाद इतने ट्रक वापस लौटे नहीं थे. हमने काफी इन्हे भरोसा दिलाया आगे काम करने के लिए जिसमें स्थानीय ट्रांसपोर्ट एजंसियों ने भी हिम्मत दिखाते हुए सहयोग दिया और काम जारी रखा. चौधरी ने बताया कि गुरुवार रात की घटना के बाद काफी डर पैदा हो गया है और ट्रक वापस भी चले गए हैं, लेकिन दोबारा से विश्वास बहाल का प्रयास किया जा रहा है.