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जम्मू कश्मीर: सेब व्यापरियों को निशाना बना रहे आतंकी

बुधवार शाम आतंकियों ने दक्षिणी कश्मीर के शोपियां ज़िले के त्रेंज इलाके में पंजाब के दो सेब व्यापारियों हमला किया, जो इलाके में सेब की खरीद खरीदने आए हुए थे. इनमें से एक चरणजीत सिंह की मौत हो गयी जबकि संजय सिंह नामक व्यापारी गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में इलाज करा रहे हैं.

जम्मू कश्मीर: सेब व्यापरियों को निशाना बना रहे आतंकी
दहशत में जम्मू कश्मीर के सेब कारोबारी.

श्रीनगर: दक्षिणी कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से लगातार गैर रियासती लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. तीन हमलों में दो हमले सेब के व्यापार से जुड़े लोगों पर किये गए हैं. ऐसे में कश्मीर की मेवा उद्द्योग से जुड़े लोगों के मन में भी डर पैदा हो गया है. अधिकतर लोगों में अपनी फसल को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि आतंकी धमकियों के चलते वह अपनी सेब की फसल को देश के अन्य राज्यों में भेजने के लिए रास्ता तलाश रहे हैं. जम्मू कश्मीर पुलिस ने दावा किया है कि इन हमलों के ज़िम्मेदार आतंकियों की पहचान हुई है. पुलिस ने इन वांटेड आतंकियों के पोस्टर जारी कर लोगों से इनकी जानकारी देने की अपील की है.   

बुधवार शाम आतंकियों ने दक्षिणी कश्मीर के शोपियां ज़िले के त्रेंज इलाके में पंजाब के दो सेब व्यापारियों हमला किया, जो इलाके में सेब की खरीद खरीदने आए हुए थे. इनमें से एक चरणजीत सिंह की मौत हो गयी जबकि संजय सिंह नामक व्यापारी गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. बुधवार को दिन में पुलवामा के निहामा में आतंकियों ने ईंटों के भट्ठे पर काम करने वाले छत्तीसगढ़ के एक मज़दूर सेठी साही को गोली मारकर उसकी हत्या कर की थी. इसे पहले सोमवार शाम को भी शोपियां ज़िले में आतंकियों ने राजस्थान के एक सेब ट्रक ड्राइवर की गोली मारकर हत्या की थी और उसके ट्रक में भी आग लगा दी थी.

इन घटनाओं के बाद घाटी और बाहर से यहां आने वाले व्यापारी काफी डरे हुए हैं, क्योंकि दक्षिणी कश्मीर में घटी इन घटनाओं में आतंकियों की ओर से अधिकतर ऐसे गैर स्थानीय लोगों को निशाना बनाया गया जो सेब का व्यापार करने के लिए यहां आये हुए थे. सेब उद्योग से जुड़े एक किसान अली मोहम्मद ने बताया, 'पहले तो हम इस बंद की मार झेल रहे थे, लेकिन अब हमें आतंक की मार झेलनी पड़ रही है.' उन्होंने कहा कि आजकल सेब उतारने के साथ-साथ बाहर भेजने का समय है. इस समय में ही बाहर से व्यापारी सेब खरीदने के लिए बाहर से आते हैं, लेकिन अब उसे (गैर रियासती व्यापारी) यह यकीन नहीं कि वह कश्मीर से ज़िंदा लौटेगा या नहीं. ऐसे में वह कैसे आएगा ?' एक अन्य किसान अब्दुल रहीम ने बताया, 'इस बार फसल अच्छी थी, लेकिन बाहर रेट अच्छे नहीं मिल रहे. ट्रक भी समय पर नहीं पहुंच रहे हैं. हर दुसरे दिन हम माल लोड करते हैं.'

जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से भी दक्षिणी कश्मीर में घटी इन घटनाओं के बाद उन जगहों के आस पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जहां आतंकियों के हमले आशंका हैं. पुलिस द्वारा शोपियां ज़िले में अंजाम दी गई घटनाओं में मल्लविस वांटेड आतंकियों के पोस्टर जारी कर लोगों से इनकी जानकारी देने में सहयोग करने की अपील की गयी हैं. पुलिस के अनुसार जिन आतंकियों ने इन घटनाओं को अंजाम दिया उनमें स्थानीय आतंकी नवीद बाबू और राहिल मागरे शामिल है. नवीद बाबू आतंकवाद में शामिल होने से पूर्व जम्मू कश्मीर पुलिस में कांस्टेबल था और उसकी कई मामलों में पुलिस को तलाश है.

इससे पूर्व भी अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा के बाद हज़ारों गैर रियासती वर्कर घाटी छोड़कर चले गए थे. मगर, हालत सुधरते और प्रशासन के आश्वासन को देखते सेब व्यापारी और मज़दूर घाटी वापस लोटे थे. मगर अचानक खौफ पैदा होने से कई लोग फिर घाटी छोड़कर जाने की सोच रहे हैं. सुरक्षाबल लोगों और व्यापारियों को पूरी सुरक्षा देने का दवा कर रहे हैं. 

15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने भी किसानो को पूर्ण सुरक्षा मुहैया करवाने का आश्वासन दिलाते हुए उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा प्रदान करवाने की बात कही है. उन्होंने आश्वासन दिलाया कि उन्हें फसल उतारने और उसे बेचने की पूरी अनुमति दी जाएगी. इतना ही नहीं उन्होंने आश्वासित करते हुए कहा कि केवल किसानो को ही नहीं, बल्कि हर उस व्यवसायी को सुरक्षा प्रदान की जाएगी जो अपना कामकाज सामान्य रूप से करना चाहता है.

कश्मीर में सेब के व्यापार पर यहां की आर्थिक व्यवस्था निर्भर है. कश्मीर घाटी सेब के राष्ट्रीय उत्पादन में 71 प्रतिशत का योगदान देती है. बागवानी का 8 से 10 प्रतिशत जीडीपी अनुपात और सालाना 8000 से 1000 करोड़ का सालाना कारोबार होता है. आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि घाटी में 7 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं.