जन्‍माष्‍टमी पर इस बार कई सालों के बाद बेहद पावन संयोग, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर्व इस बार गुरुवार यानी 25 अगस्त को मनाया जाएगा। इस पर्व पर इस बार तिथि, वार, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति बहुत खास है। ज्योतिषियों की मानें तो जन्माष्टमी पर कई ऐसे संयोग भी बन रहे हैं, जो द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय थे। कृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन अष्टमी उदया तिथि और मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग है, जिसे काफी शुभ माना जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी कृष्ण जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में मनाना ही श्रेष्ठ माना जाता है। बताया जा रहा है कि इस योग में भगवान की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल मिलेगा और सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

जन्‍माष्‍टमी पर इस बार कई सालों के बाद बेहद पावन संयोग, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

नई दिल्‍ली : भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर्व इस बार गुरुवार यानी 25 अगस्त को मनाया जाएगा। इस पर्व पर इस बार तिथि, वार, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति बहुत खास है। ज्योतिषियों की मानें तो जन्माष्टमी पर कई ऐसे संयोग भी बन रहे हैं, जो द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय थे। कृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन अष्टमी उदया तिथि और मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग है, जिसे काफी शुभ माना जा रहा है। इस बार जन्माष्टमी कृष्ण जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में मनाना ही श्रेष्ठ माना जाता है। बताया जा रहा है कि इस योग में भगवान की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल मिलेगा और सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

भादो मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर गुरुवार को कृष्ण जन्मोत्सव की धूम रहेगी। भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में धरती पर आठवां अवतार लिया था। भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी और जन्माष्टमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झूलाने की परंपरा भी है।

बताया जा रहा है कि इस बार की जन्माष्टमी पर वही संयोग बनने जा रहा है जो भगवान कृष्ण के जन्म पर बना था। इस बार माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी भगवान कृष्ण जन्म के समय थी। इस बार इस दिन बहुत ही विशेष संयोग हैं। इस दिन अष्टमी उदया तिथि में और मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा। जिसके कारण इस दिन पूरा व्रत करना काफी फलदायक साबित हो सकता है।

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। पंडितों के अनुसार, 24 अगस्त बुधवार की रात 10.13 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। इस वजह से तिथि काल मानने वाले बुधवार को भी जन्मोत्सव मनाएंगे।

हालांकि, गुरुवार को उदयाकाल की तिथि में व्रत जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। मंदिरों में होगी विशेष आराधना कृष्ण जन्मोत्सव के दिन मंदिरों सहित घर-घर भगवान के झूले सजेंगे और विशेष आराधना होगी। मंदिरों में मोहक झांकी के साथ ही भगवान के दर्शन होंगे। विभिन्न मंदिरों में मध्य रात्रि भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।