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अपने ही बच्चों को मार देते हैं अंडमान में बसे जारवा जनजाति के लोग, जानिये क्यों?

केंद्र शासित प्रदेश अंडमान में परंपरा के नाम पर जारवा जनजाति लोग अपने ही बच्चों को मार रहे हैं। जारवा जनजाति के लोगों की यह करतूत पुलिस के लिये भी मुसीबत का सबब बनती जा रही है। यदि बच्चा काले रंग के बजाय थोड़ा भी गोरा पैदा हो जाए तो मां को डर लगने लगता है कि कहीं उसके समुदाय का ही कोई बच्चे को मार ना डाले। 

अपने ही बच्चों को मार देते हैं अंडमान में बसे जारवा जनजाति के लोग, जानिये क्यों?
फोटो सौजन्य- एपी

नई दिल्ली : केंद्र शासित प्रदेश अंडमान में परंपरा के नाम पर जारवा जनजाति लोग अपने ही बच्चों को मार रहे हैं। जारवा जनजाति के लोगों की यह करतूत पुलिस के लिये भी मुसीबत का सबब बनती जा रही है। यदि बच्चा काले रंग के बजाय थोड़ा भी गोरा पैदा हो जाए तो मां को डर लगने लगता है कि कहीं उसके समुदाय का ही कोई बच्चे को मार ना डाले। 

...जानिये क्यों करते हैं ऐसा

रिपोर्ट्स के मुताबिक अफ्रीका मूल के करीब 50 हजार साल पुराने जारवा समुदाय के लोगों का वर्ण बेहद काला होता है। इस समुदाय में परंपरा के अनुसार यदि बच्चे की मां विधवा हो जाए या उसका पिता किसी दूसरे समुदाय का हो तो बच्चे को मार दिया जाता है। ऐसे में बच्चे का वर्ण थोड़ा भी गोरा हो तो कोई भी शख्स उसके पिता को दूसरे समुदाय का मानकर उसकी हत्या कर देता है और समुदाय में इसके लिये कोई सजा भी नहीं है। इस समुदाय के बारे में जानकारी रखने वाले डॉ. रतन चंद्राकर ने लिखा है कि जारवा जनजाति में नवजात को समुदाय से जुड़ी सभी महिलाएं स्तनपान कराती हैं। इसके पीछे जनजाति की मान्यता है कि इससे समुदाय की शुद्धता और पवित्रता बनी रहती है।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्जित किया था पर्यटकों का प्रवेश

ऐसा माना जाता है कि अंडमान द्वीप के उत्तरी इलाके में रहने वाली यह जनजाति 90 के दशक में पहली बार बाहरी दुनिया के संपर्क में आई थी। इस समुदाय के इलाके में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है। ये लोग अंडमान ट्रंक रोड के नजदीकी रिहायशी इलाकों में रहते हैं। दरअसल, कुछ सालों पहले ऐसी घटनाएं हुई थीं, जिनमें कथित तौर पर पर्यटकों ने समुदाय की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया था, जिसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस रोड से पर्यटकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि बाद में इस फैसले में संशोधन किया गया था।