कोयला घोटाला: झारखंड के पूर्व CM मधु कोड़ा दोषी करार, गुरुवार को सुनाई जाएगी सजा

यह मामला झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लि(वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित अनियमिताओं से संबंधित है. 

कोयला घोटाला: झारखंड के पूर्व CM मधु कोड़ा दोषी करार, गुरुवार को सुनाई जाएगी सजा
मधु कोड़ा (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: सीबीआई की विशेष अदालत ने कोयला घोटाले में एक अहम फैसला सुनाते हुए झारखंड के मुख्‍यमंत्री मधु कोड़ा को दोषी करार दिया है. झारखंड के पूर्व मुख्‍य सेक्रेट्री अशोक कुमार बसु और पूर्व कोल सचिव एचसी गुप्‍ता भी दोषी करार दिए गए हैं. इस प्रकार कोड़ा समेत सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया गया है. सजा का ऐलान गुरुवार को किया जाएगा. 

क्‍या था मामला
यह मामला झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लि(वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित अनियमिताओं से संबंधित है. कोड़ा, गुप्ता और कंपनी के अलावा, मामले में अन्य आरोपियों झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एके बसु, दो लोक सेवक-- बसंत कुमार भट्टाचार्य, बिपिन बिहारी सिंह, वीआईएसयूएल के निदेशक वैभव तुलस्यान, कोड़ा के कथित करीबी सहयोगी विजय जोशी और चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन कुमार तुलस्यान को भी दोषी करार दिया गया है. इनको अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी(आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 409 (सरकारी कर्मियों द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार की रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज मामले में दोषी पाया है. 

जिरह के दौरान सीबीआई ने कहा था कि कंपनी ने आठ जनवरी 2007 को राजहरा नॉर्थ कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन किया था. सीबीआई ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार और इस्पात मंत्रालय ने वीआईएसयूएल को कोयला खंड आवंटन करने की अनुशंसा नहीं की बल्कि 36वीं अनुवीक्षण समिति (स्क्रींनिग कमेटी) ने आरोपित कंपनी को खंड आवंटित करने की सिफारिश की थी. 

तथ्‍यों को छुपाया गया
सीबीआई ने कहा कि अनुवीक्षण समिति के अध्यक्ष गुप्ता ने कोयला मंत्रालय का प्रभार भी देख रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कथित तौर पर इन तथ्यों को छुपाया कि झारखंड सरकार ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक आवंटन करने की सिफारिश नहीं की थी. एजेंसी ने कहा कि कोड़ा, बसु और दो आरोपी लोकसेवकों ने वीआईएसयूएल को कोयला ब्लॉक आवंटित करने के पक्ष में साजिश रची थी. 

चुनाव लड़ने पर पाबंदी
इससे पहले इसी साल 29 सितंबर को चुनाव आयोग ने 2009 में लड़े गए लोकसभा के चुनाव में खर्च का ब्यौरा ना देने के लिए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को तीन साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य अघोषित कर दिया था. कोड़ा ने झारखंड की सिंहभूम लोकसभा सीट से चुनाव जीता था. आयोग द्वारा जारी आदेश में कहा गया था, ''कानून द्वारा जरूरी तरीके के हिसाब से अपने चुनाव खर्च का ब्यौरा ना देने तथा इस तरह की नाकामी के लिए उनके पास कोई कारण या औचित्य ना होने को लेकर तीन साल तक चुनाव लड़ने की दृष्टि से अयोग्य करार दिया जाता है.''  

मुख्य चुनाव आयुक्त ए के जोति एवं चुनाव आयुक्त ओ पी रावत के हस्ताक्षर वाले आयोग के आदेश में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 10 ए का हवाला देते हुए कोड़ा को अयोग्य करार दिया गया. आयोग 2009 के बाद कथित रूप से चुनाव खर्च के झूठे दस्तावेज पेश करने के लिए कोड़ा के खिलाफ मामला सुन रहा था. कोड़ा 2009 में निर्दलीय सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे और अक्तूबर, 2010 में चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजकर पूछा था कि उन्हें इस आधार पर अयोग्य करार क्यों ना दिया जाए कि उन्होंने कथित रूप से 18,92,353 रुपए की वास्तविक राशि के उलट अपना चुनाव खर्च बहुत कम दिखाया था.

49 पन्नों के आदेश में कहा गया कि झारखंड के नेता द्वारा जमा किए गए चुनाव खर्च का ब्यौरा ''झूठा'' था. कोड़ा ने चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़े करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख किया था लेकिन अदालत ने आयोग को नेता के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की मंजूरी दे दी थी.

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