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जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना के साथ मुठभेड़ में दो उग्रवादी ढेर

जम्मू कश्मीर में पिछले माह पुलिस बल छोड़कर उग्रवाद की राह पकड़ने वाले दो विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) गुरुवार को डोडा जिले में सेना के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारे गए। डोडा जिले में करीब चार साल बाद मुठभेड़ हुई है। अब इस जिले में उग्रवादियों की उपस्थिति लगभग नहीं के बराबर है।

जम्मू-कश्मीर: डोडा में सेना के साथ मुठभेड़ में दो उग्रवादी ढेर

जम्मू : जम्मू कश्मीर में पिछले माह पुलिस बल छोड़कर उग्रवाद की राह पकड़ने वाले दो विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) गुरुवार को डोडा जिले में सेना के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारे गए। डोडा जिले में करीब चार साल बाद मुठभेड़ हुई है। अब इस जिले में उग्रवादियों की उपस्थिति लगभग नहीं के बराबर है।

रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी एसएन आचार्य ने आज यहां बताया कि विशिष्ट सूचना के आधार पर जवानों ने दूरस्थ डोडा पट्टी में करीब आधी रात को एक अभियान चलाया। आचार्य ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में सुबह करीब साढ़े चार बजे दो उग्रवादी मारे गए। उन्होंने बताया कि उनके शव बरामद किए जा चुके हैं। उनके पास से एक एके रायफल, एक इन्सास (आईएनएसएएस) रायफल और कुछ गोलाबारूद मिला है। उन्होंने बताया कि विस्तृत ब्यौरे की प्रतीक्षा की जा रही है।

जम्मू जोन के आईजी दानिश राणा ने बताया कि मुठभेड़ आज तड़के हुई जिसमें यह दो पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) मारे गए जिन्होंने पिछले माह पुलिस बल छोड़ा था और उग्रवाद में शामिल हो गए थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए दोनों उग्रवादियों की पहचान गुलाम नबी मंगनू उर्फ मौलवी (कूट नाम गुल्ला टेलर) और रियाज अहमद के तौर पर हुई है। मौलवी पहले लश्कर-ए-तोएबा का जिला कमांडर था और उसने वर्ष 2010 में पुलिस के समक्ष समर्पण कर दिया था। बाद में वह एसपीओ के तौर पर पुलिस में शामिल हो गया था। रियाज हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी था और 2010 में उसने समर्पण किया था। अधिकारियों ने बताया कि मौलवी 2003 में लश्कर ए तोएबा में और रियाज 1999 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। ये दोनों सात और आठ सितंबर की रात को पुलिस बल से एक एके रायफल, एक इनसास रायफल और क्रमश: 60 तथा 70 कारतूस लेकर चले गए थे और फिर से उग्रवाद में शामिल हो गए थे।

राणा ने बताया कि हम उन पर नजर रख रहे थे। आज गढ़ी नाला में मुठभेड़ में दोनों मारे गए। पिछले कई वषरें से इस इलाके में उग्रवाद नहीं है। दोनों एसपीओ हथियार ले कर भागे थे लेकिन कुछ ही समय में उनका हमने खात्मा कर दिया। जून 2011 में यहां सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में लश्कर ए तैयबा के दो उग्रवादी मारे गए थे।