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JNU लापता छात्र मामला : 2 साल बाद भी नहीं मिला सुराग, तो HC ने दी CBI को केस बंद करने की इजाजत

जस्टिस एस मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की अध्यक्षता पीठ ने नजीब की मां से कहा कि निचली अदालत में जहां पर नजीब की गुमशुदगी से जुड़ा मामला चल रहा है वहां पर अपना पक्ष रख सकते हैं.

JNU लापता छात्र मामला : 2 साल बाद भी नहीं मिला सुराग, तो HC ने दी CBI को केस बंद करने की इजाजत

नई दिल्ली : जेएनयू के गुमशुदा छात्र नजीब अहमद को पता लगाने में सीबीआई नाकाम रही है. दिल्ली हाईकोर्ट ने नजीब की मां की तरफ से दायर याचिका का निपटारा करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूर कर लिया. जस्टिस एस मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की अध्यक्षता पीठ ने नजीब की मां से कहा कि निचली अदालत में जहां पर नजीब की गुमशुदगी से जुड़ा मामला चल रहा है वहां पर अपना पक्ष रख सकते हैं. दरअसल, नजीब 15 अक्टूबर 2016 से गुमशुदा है और अब तक उसका पता नहीं चल पाया है. 

4 सितंबर को ही हुई थी मामले की सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने चार सितंबर को सीबीआई व पीड़ित पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की जांच हाईकोर्ट ने 16 मई 2017 को सीबीआई को सौंपी थी. पीएचडी का छात्र नजीब अक्तूबर 2016 से लापता है. वहीं, उसकी मां ने प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उसे तलाश कराने की गुहार लगाई थी. नजीब अहमद के लापता होने की जांच दिल्ली पुलिस व कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर चुकी है. सीबीआई पूर्व में ही इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की बात कह चुकी थी.

क्या है पूरा मामला
आपको बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य छात्रों के साथ हुए झगड़े के अगले दिन 15 अक्तूबर 2016 को नजीब गायब हो गया था. दूसरी ओर याची के वकील कोलिन गोंस्लविस ने कोर्ट के समक्ष कहा था कि यह एक राजनीतिक मामला है और सीबीआई राजनीतिक दबाव के चलते इस केस को नहीं सुलझा पाई.फातिमा नफीस ने 25 नवंबर 2016 को याचिका दायर कर एसआईटी बनाने और उसके बेटे के तलाश करने की मांग की थी.सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में उसे निचली अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी है, लेकिन उससे पहले वह जानकारी हाईकोर्ट के समक्ष लाना चाहती थी.