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जज लोया केस: वकीलों की ऊंची आवाज पर SC ने कहा, कोर्ट को मछली बाजार ना बनाएं

एसआईटी जांच की मांग कर रहे याचिकाकर्ता और महाराष्ट्र सरकार के वकील के बीच तीखी बहस हुई.

जज लोया केस: वकीलों की ऊंची आवाज पर SC ने कहा, कोर्ट को मछली बाजार ना बनाएं
सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ में सोमवार को दोनों पक्षों के वकीलों के बीच गर्मागर्म बहस हुई

नई दिल्ली (सुमित कुमार): गुजरात के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई करने वाले सीबीआई जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 9 फरवरी को भी सुनवाई जारी रहेगी. सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ में सोमवार को दोनों पक्षों के वकीलों के बीच गर्मा गर्म बहस हुई. एसआईटी जांच की मांग कर रहे याचिकाकर्ता और महाराष्ट्र सरकार के वकील के बीच तीखी बहस हुई. याचिकाकर्ता बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के वकील दुष्यंत दवे ने वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश होने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि साल्वे पहले अमित शाह के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश हो चुके हैं, ऐसे में वो महाराष्ट्र सरकार की ओर से अब पेश नहीं हो सकते हैं.

ऊंची आवाज पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने एक अन्य याचिकाकर्ता और पत्रकार की ओर से वकील पल्लव सिसोदिया की पेशी पर भी आपत्ति जताई. दवे ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता बीरआर लोने का असल उद्देश्य बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराना था. सिसोदिया ने दवे के आरोपों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ये न्यायपालिका की छवि नुकसान पहुंचाने जैसा है. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कोर्ट में ऊंची आवाज में आरोप-प्रत्यारोप पर नाराजगी जताई और दोनों पक्षों से कहा कि कोर्ट की गरिमा का ध्यान रखें. अदालत को मछली बाजार ना बनाएं और कम से कम अदालत में लगीं पूर्व न्यायविदों की तस्वीरों का ही ख्याल कर लें. याची बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के वकील दुष्यंत दवे ने कोर्ट से मांग की कि हरीश साल्वे और पल्लव सिसोदिया को मामले में पेश होने से रोका जाए. दवे ने कहा कि वो अलग से एक याचिका दायर कर लोया मामले के गवाहों (लोया के साथी जजों) को क्रॉस एग्जामिन करने की मांग करेंगे.

पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने दी थी चेतावनी
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया था, जिसमें सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस का ट्रायल महाराष्ट्र में करने का निर्देश दिया गया था. दवे ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में साफ-साफ मनाही के बावजूद इस मामले में जज का ट्रांसफर हुआ. दवे ने अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा था कि इस केस (सोहराबुद्दीन एनकाउंटर) से जुड़े 1000 से ज्यादा पेज थे लेकिन नए जज ने इतनी जल्दबाजी दिखाई कि 30 दिसंबर 2014 को ही अमित शाह को आरोप मुक्त कर दिया था. इसके बाद तीन साल गुजरने के बाद भी सीबीआई ने अमित शाह को आरोप मुक्त किये जाने के इस फैसले को चुनौती नहीं दी है. दवे की ओर से अमित शाह का नाम लिए जाने पर राज्य सरकार की ओर से पेश वकील मुकल रोहतगी ने कहा था कि दवे को इस मामले में अप्रासंगिक तथ्यों को उठाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने दुष्यंत दवे को चेताया था कि इस मामले की सुनवाई में आगे से सोहराबुद्दीन केस का ज्रिक ना किया जाए.

क्या है पूरा मामला? 
जज लोया 26 नवंबर 2005 को कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन शेख मामले की सुनवाई कर रहे थे. सीबीआई के मुताबिक सोहराबुद्दीन शेख और उनकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस ने हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जाते वक्त अगवा कर लिया था. 2005 में गांधीनगर के पास उसका फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया. पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से सोहराबुद्दीन के तार जुड़े होने की बात कही गई थी. सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के वक्त अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे. 2012 में शीर्ष अदालत ने मामले को महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था. 2014 में मामले की सुनवाई कर रहे जज जेटी उत्पत का अचानक तबादला हो गया था और उसके बाद जस्टिस लोया मामले की सुनवाई कर रहे थे. इस केस में बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के कारोबारी विमल पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व चीफ पीसी पांडे, एडीजीपी गीता जौहरी, गुजरात पुलिस के ऑफिसर अभय चूडासम्मा और एनके अमीन बरी हो चुके हैं. फिलहाल पुलिस अधिकारियों समेत 23 आरोपियों के खिलाफ मामले की जांच चल रही है.