जज vs सीजेआई: विवादों पर बोले जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायपालिका में कोई संकट नहीं है

यह पूछे जाने पर कि उनका कृत्य क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है. मैं बात नहीं कर सकता.’

जज vs सीजेआई: विवादों पर बोले जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायपालिका में कोई संकट नहीं है
नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान न्यायमूर्ति रंजन गोगोई. (IANS/12 Jan, 2018)

कोलकाता: भारत के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ ‘चयनात्मक’ तरीके से' मामलों के आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों को लेकर एक तरह से बगावत करने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शनिवार (13 जनवरी) को कहा कि ‘कोई संकट नहीं है.’ न्यायमूर्ति गोगोई एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आये थे. कार्यक्रम के इतर उनसे पूछा गया कि संकट सुलझाने के लिए आगे का क्या रास्ता है, इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई संकट नहीं है.’ यह पूछे जाने पर कि उनका कृत्य क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है. मैं बात नहीं कर सकता.’ उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों के पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आये थे.

उल्लेखनीय है कि न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए शुक्रवार (12 जनवरी) को एक संवाददाता सम्मेलन किया और कहा कि शीर्ष अदालत में हालात ‘सही नहीं हैं’ और कई ऐसी बातें हैं जो ‘अपेक्षा से कहीं कम’ थीं. प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘... कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई चीजें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं कम थीं.’

अगले सीजेआई बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं न्यायाधीश रंजन गोगोई 
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के इस साल दो अक्तूबर को प्रधान न्यायाधीश के तौर पर सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायाधीश रंजन गोगोई अगले प्रधान न्यायाधीश बनने की कतार में हैं. प्रधान न्यायाधीश के तौर पर उनका कार्यकाल 17 नवंबर, 2019 तक का होगा. उनके नेतृत्व वाली एक पीठ ने पिछले महीने निर्देश दिया था कि सांसदों एवं विधायकों से जुड़े मामलों से खासतौर पर निपटने के लिए गठित की जाने वाले 12 विशेष अदालतें एक मार्च, 2018 से काम करना शुरू कर दें.

न्यायमूर्ति गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट डालने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मार्कण्डेय काट्जू को अदालत की अवमानना का नोटिस दिया था और बाद में काट्जू न्यायालय में पेश हुए और बिना किसी शर्त के माफी मांगी जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया था.

(इनपुट एजेंसी से भी)