जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर बने देश के 43वें प्रधान न्‍यायाधीश

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर ने गुरुवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ ली। इसके साथ ही वह देश के 43वें मुख्‍य न्‍यायाधीश बन गए। उनका कार्यकाल 13 महीने का होगा।  बुधवार को मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत हो रहे जस्टिस एचएल दत्तू के विदाई समारोह में जस्टिस ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित 58 हजार मामलों को निपटाना सबसे बड़ी चुनौती बताया। जस्टिस ठाकुर की पहली नियुक्ति जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में 16 फरवरी 1994 को अतिरिक्त न्यायधीश के रूप में हुई थी। इससे पहले जस्टिस टीएस ठाकुर लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में ही प्रैक्टिस करते रहे थे। उन्हें सिविल, आपराधिक, संवैधानिक, टैक्स मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।

जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर बने देश के 43वें प्रधान न्‍यायाधीश

नई दिल्‍ली : न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने गुरुवार को भारत के 43वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में शपथ ग्रहण कराई।

63 वर्षीय न्यायमूर्ति ठाकुर ने राष्ट्रपति भवन के शानदार दरबार हॉल में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में ईश्वर के नाम पर शपथ ग्रहण की। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कैबिनेट में उनके सहयोगियों और पूर्व प्रधान न्यायाधीशों समेत कई गणमान्य हस्तियों ने भाग लिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ग्रहण की। उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष पद की शपथ ग्रहण की।

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश 63 वर्षीय न्यायमूर्ति ठाकुर को न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की सेवानिवृत्ति के बाद प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। न्यायमूर्ति दत्तू कल सेवानिवृत्त हुए थे। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने उस पीठ की अध्यक्षता की जिसने इंडियन प्रीमियर लीग में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग घोटालों के आरोपों के मद्देनजर बीसीसीआई में सुधार संबंधी फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति ठाकुर ने उस पीठ की भी अध्यक्षता की जिसने पूर्वी भारत में हुए करोड़ों रूपए के चिंट फंड घोटाले की जांच के आदेश दिए थे। इस घोटाले को सारदा घोटाले के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने करोड़ों रुपये के एनआरएचएम घोटाले की भी सुनवाई की जिसमें कई नेताओं और नौकरशाहों के साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा भी आरोपी हैं। चार जनवरी 1952 को जन्मे न्यायमूर्ति ठाकुर एक वर्ष से अधिक समय तक सीजेआई का पदभार संभालेंगे और चार जनवरी 2017 को सेवानिवृत्त होंगे। इस समारोह में न्यायमूर्ति ठाकुर की मां सरस्वती ठाकुर और उनके परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हुए।

जस्टिस ठाकुर की पहली नियुक्ति जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में 16 फरवरी 1994 को अतिरिक्त न्यायधीश के रूप में हुई थी। इससे पहले जस्टिस टीएस ठाकुर लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में ही प्रैक्टिस करते रहे थे। उन्हें सिविल, आपराधिक, संवैधानिक, टैक्स मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। मार्च 1994 में जस्टिस ठाकुर को स्थानांतरित कर कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायधीश नियुक्त किया गया। जुलाई 2004 में जस्टिस ठाकुर की नियुक्ति दिल्ली उच्च न्यायालय में की गई, जहां वे अप्रैल 2008 तक कार्यकारी मुख्य न्यायधीश के पद पर रहे।