राज्यसभा में जुवेनाइल बिल पेश हुआ, बहस जारी

केंद्र सरकार ने जुवेनाईल जस्टिस बिल को आज राज्यसभा में पेश कर दिया है। बिल पर सदन में बहस जारी है।

राज्यसभा में जुवेनाइल बिल पेश हुआ, बहस जारी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जुवेनाईल जस्टिस बिल को आज राज्यसभा में पेश कर दिया है। बिल पर सदन में बहस जारी है।

इससे पहले के घटनाक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हम खुद जूवेनाइल जस्टिस विधेयक पारित करने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले कांग्रेस सदन को चलने दे। राज्यसभा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने किशोर न्याय कानून में संशोधन के प्रावधान वाले विधेयक को जल्दी पारित किए जाने पर बल दिया है।

निर्भया गैंगरेप के दोषी नाबालिग की रिहाई के खिलाफ बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक दलों ने भी पार्टी लाइन से ऊपर उठते हुए एकजुटता दिखाई है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने किशोर न्याय कानून में संशोधन जल्द से जल्द पारित करने की मंशा जताई है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ‘सरकार तैयार है और किशोर न्याय विधेयक को पारित कराना चाहती है।’ कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ‘विधेयक को विचार और पारित कराने के लिए विगत में तीन बार सूचीबद्ध किया गया, हालांकि सदन नहीं चल पाया।’ प्रसाद ने कहा, ‘विपक्ष, खासकर कांग्रेस की वजह से विधेयक आज तक पारित नहीं हो पाया है। देश में चिंता और गुस्सा है।’

नाबालिग दोषी को रिहा किए जाने के मुद्दे को लेकर नृशंस निर्भया मामले की यादें एक बार फिर ताजा हो जाने की पृष्ठभूमि में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने सुबह उच्च सदन में शून्यकाल में किशोर न्याय संबंधी विधेयक का मुद्दा उठाया। डेरेक ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है ताकि पूर्व निर्धारित कामकाज को स्थगित कर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) विधेयक 2015 पर चर्चा की जाए।

संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि देश भर में व्यापक आंदोलन हो रहे हैं और सदन को किशोर न्याय संबंधी विधेयक पर चर्चा करनी चाहिए। इस पर माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि अगर सरकार इस विधेयक को इतना महत्वपूर्ण मानती है तो उसे आज के लिए क्यों सूचीबद्ध नहीं किया गया। नायडू ने कहा कि इस विधेयक को आठ, 10 और 11 दिसंबर की कार्यसूची में शामिल किया गया था लेकिन सदन में कामकाज नहीं हो सका। गौर हो कि जुवेनाइल जस्टिस बिल लोकसभा में पास हो चुका है, लेकिन राज्यसभा में हंगामे के कारण अटका हुआ है। लोकसभा में यह बिल मई 2015 में पास हो गया था।  

गौर हो कि नए जुवेनाइल जस्टिस बिल में कहा गया है कि रेप, मर्डर और एसिड अटैक जैसे खतरनाक अपराधों में शामिल नाबालिगों को बालिग माना जाए। गंभीर अपराध करने वाले नाबालिगों पर केस आम अदालतों में और बालिगों के लिए कानून के मुताबिक ही चलेगा। किशोर न्याय बोर्ड यह निर्णय करेगा कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में शामिल 16 वर्ष से अधिक उम्र के किशोर को सुधार गृह में रखा जाए या उस पर सामान्य अदालत में मुकदमा चलाया जाए। पुराने कानून के मुताबिक नाबालिग को ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक के लिए सुधार गृह में रखा जा सकता है।