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कारगिल में जीत के लिए वाजपेयी ने इस मंदिर में कराई थी उपासना

कारगिल में हुए भारत- पाकिस्‍तान के युद्ध में हर देशवासी के मन में दुश्‍मन पर जीत की बात थी. इस दौरान तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर भी ऑपरेशन विजय को की सफलता के लिए काफी दबाव था. बताया जाता है कि 1999 में लड़े गए इस युद्ध में विजय के लिए वाजपेयी ने विशेष उपासना कराई थी. इसके बाद ही भारतीय सेना को पाकिस्‍तान के खिलाफ कामयाबी मिली थी.

कारगिल में जीत के लिए वाजपेयी ने इस मंदिर में कराई थी उपासना
कई दिनों तक दुश्‍मन पर जीत के लिए साधना और यज्ञ किया. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

नई दिल्‍ली : कारगिल में हुए भारत- पाकिस्‍तान के युद्ध में हर देशवासी के मन में दुश्‍मन पर जीत की बात थी. इस दौरान तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर भी ऑपरेशन विजय को की सफलता के लिए काफी दबाव था. बताया जाता है कि 1999 में लड़े गए इस युद्ध में विजय के लिए वाजपेयी ने विशेष उपासना कराई थी. इसके बाद ही भारतीय सेना को पाकिस्‍तान के खिलाफ कामयाबी मिली थी.

युद्ध में भारतीय सेना की कामयाबी के लिए वाजपेयी ने मध्य प्रदेश के दतिया में पीताम्बरा पीठ की मां बगलामुखी के मंदिर में विशेष यज्ञ करवाया था. ऐसी मान्‍यता है कि दतिया की मां बगलामुखी की उपासना से शत्रु का नाश होता है. जब-जब देश पर युद्ध की विपत्ति आई तब-तब यहां पर विशेष यज्ञ करवाया गया. 1965 और 1971 के युद्ध में भी मां बगलामुखी के मंदिर में विजय प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया गया था.

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कारगिल युद्ध के दौरान जब सबकी निगाहें दुश्‍मन की गतिविधियों पर टिकी हुई थीं तब अटल बिहारी वाजपेयी ने दतिया के मां बगलामुखी के मंदिर में यज्ञ करवाने के लिए कहा था. इसके बाद साधकों ने कई दिनों तक दुश्‍मन पर जीत के लिए साधना और यज्ञ किया. यज्ञ पूरा होने पर दुश्‍मन को एक बार फिर से भारतीय सेना ने चारों खानों चित कर दिया.

जुलाई 1999 में भारतीय सेना ने पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना को एलओसी के दूसरी ओर खदेड़ दिया. इसी तरह 1962 में चीन के आक्रमण के समय भी यहां पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया था. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजमाता विजयाराजे के अलावा मध्य प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उमा भारती की इस मंदिर से खासी आस्था जुड़ी हुई है.

दरअसल, अधिष्ठात्री देवी के साथ ही मां बगलवामुखी को राजसत्ता प्राप्ति की मां भी माना जाता है. मान्यता है कि देवी के दर पर आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है और उसे राजसत्ता का सुख जरूर मिलता है.