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कर्नाटक संकट: सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई आज

16 विधायकों के इस्तीफे से मुश्किल में फंसी कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार का संकट जस का तस बना हुआ है.

कर्नाटक संकट: सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई आज
आज सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई होनी है.

बेंगलुरू: 16 विधायकों के इस्तीफे से मुश्किल में फंसी कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार का संकट जस का तस बना हुआ है. आज सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई होनी है. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक में कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों की याचिका पर पहले से लंबित 10 विधायकों की याचिका के साथ ही सुनवाई करने पर सहमति देते हुए कहा कि सारे मामले में मंगलवार को सुनवाई की जाएगी. ये बागी विधायक चाहते हैं कि कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को उनके इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए. 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के इस आग्रह पर विचार किया कि इन्हें भी पहले से लंबित उस याचिका में पक्षकार बना लिया जाए जिस पर मंगलवार को सुनवाई होनी है. 

शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार को कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे और उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिये दायर याचिका पर 16 जुलाई तक कोई भी निर्णय लेने से रोक दिया था. कांग्रेस के 13 विधायकों और जेडीएस के तीन विधायकों ने छह जुलाई को इस्तीफा दे दिया था जबकि दो निर्दलीय विधायकों एस शंकर और एच नागेश ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. 
 
बहुमत परीक्षण 18 को 
कर्नाटक विधानसभा सोमवार को दो दिनों के लिए स्थगित कर दी गई. अब 18 जुलाई को विधानसभा की बैठक होगी जिसमें मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी सत्तारूढ़ कांग्रेस-जनता दल-जेडीएस गठबंधन सरकार को बचाए रखने के लिए विश्वास मत पेश करेंगे. विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार द्वारा बुलाई गई सदन की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सरकार द्वारा विश्वास मत प्रस्ताव पेश किए जाने तक सदन को स्थगित करने पर सहमति बनी. इसके साथ ही राज्य की वर्तमान सरकार को थोड़ा और वक्त मिल गया है ताकि वो अपने बागी विधायकों को मना ले.

बता दें 225 सदस्यीय विधानसभा में, कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास बसपा व एक क्षेत्रीय पार्टी के एक-एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन के साथ अध्यक्ष सहित कुल 118 विधायक हैं. यह आवश्यक बहुमत के निशान से सिर्फ पांच ही अधिक है. अब अगर 16 बागी और दो निर्दलीय सहित सभी 18 विधायक सत्र में शामिल नहीं होते हैं, तो मतदान के लिए सदन की प्रभावी शक्ति 205 ही रह जाएगी, जिसमें बीजेपी के 105 सदस्य होंगे जबकि अध्यक्ष और नामित सदस्य को शामिल नहीं किया जाएगा.