बेशर्म पाकिस्तान, सिखों की श्रद्धा पर लगा दिया 'जजिया' कर, कमाएगा हर दिन 75 लाख

करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का नया पैंतरा सामने आया है. करतारपुर कॉरिडोर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय श्रद्धालु से पाकिस्तान द्वारा 20 डॉलर का सेवा शुल्क लिया जाएगा. 

बेशर्म पाकिस्तान, सिखों की श्रद्धा पर लगा दिया 'जजिया' कर, कमाएगा हर दिन 75 लाख
इमरान खान की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह 20 डालर की रकम दिए बिना श्रद्धालुओं को मत्था नहीं टेकने देगी..(फाइल फोटो)

दिल्ली: करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का नया पैंतरा सामने आया है. करतारपुर कॉरिडोर से गुजरने वाले प्रत्येक भारतीय श्रद्धालु से पाकिस्तान द्वारा 20 डॉलर का सेवा शुल्क लिया जाएगा. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने कहा कि वह उन्हीं श्रद्धालुओं को मत्था टेकने देगी जो 1500 रुपये का भुगतान करेंगे, बिना पैसे दिए श्रद्धालु दर्शन नहीं कर पाएंगे. यानी पैसे नहीं तो दर्शन नहीं. पंजाब के प्रधानमंत्री अमरिंदर सिंह ने करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान द्वारा वसूली जा रही 20 डॉलर प्रति यात्री की एंट्री फीस को 'जजिया टैक्स' करार दिया है साथ ही मांग की है कि इस फीस को कम किया जाए.

पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं के पास पासपोर्ट होना जरूरी है, जहां गुरु नानक देव ने अंतिम सांस ली थी. हालांकि, वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. लेकिन आगंतुकों को उन्हें अपनी यात्रा से कम से कम एक महीने पहले ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होगा. 

क्या है जजिया कर 
भारत में मुगल साम्राज्य के दौरान जजिया कर की शुरुआत हुई थी. तब गैर-मुस्लिम देशों से यह टैक्स वसूला जाता था. आज से करीब 450 साल पहले मुगल शासक अकबर ने जजिया कर को खत्म कर दिया था. यह कर गैर मुस्लिम नागरिकों से लिया जाता था. कहा जाता है कि इस कर से आने वाली राशि को दान, तनख्वाह और पेंशन बांटने के लिए होता था. वहीं कुछ शासक इसका इस्तेमाल सैन्य खर्चों के लिए भी करते थे. वहीं कई जगह जानकारी मिलती है इस कर से मिलने वाले पैसे को शासक के निजी कोष में जमा किया जाता था. बताया जाता है कि पाकिस्तान के कुछ हिस्सा में अब भी यह टैक्स वसूला जा रहा है. खासतौर पर पाकिस्तान की अफगान सीमा पर सिखों से जजिया कर वसूला जा रहा है.

जानिए, पाकिस्तान ने क्यों लगाया जजिया कर 
भारत से करतापुर जाने वाले श्रद्धालुओं को सीमा पर एक स्लिप जारी की जाएगी, जिसकी फीस 20 डॉलर यानी करीब 1500 रुपए तय की गई है. भारत के विरोध के बावजूद पाकिस्तान ने इतनी ज्यादा फीस तय की है. हर दिन 5000 यात्री जाएंगे यानी पाकिस्तान को हर महीने 75 लाख रुपए की कमाई होगी. यह स्लिप उसी दिन के लिए होगी और शाम तक श्रद्धालु को भारत वापस लौटना होगा.

पाकिस्तान यात्रा के बारे में ऑनलाइन आवेदन
आपको बता दें कि इससे पहले भारत फ्री में दर्शन की मांग करता आया है. इमरान खान की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह 20 डालर की रकम दिए बिना श्रद्धालुओं को मत्था नहीं टेकने देगी. पंजाब के मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बुधवार को मीडिया को बताया था कि श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे के माध्यम से अपनी पाकिस्तान यात्रा के बारे में ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा के लिए 4 अक्टूबर को एक वेबसाइट शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिनके पास पासपोर्ट नहीं है.

प्रतिदिन 5,000 श्रद्धालु गुरुद्वारे में मत्था टेक सकेंगे
वे सुविधा केंद्रों या डाकघरों में 1,500 रुपये का शुल्क देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं और पूरी प्रक्रिया एक-दो दिनों के भीतर पूरी हो जाएगी, जिसके बाद उन्हें अपने पासपोर्ट मिल जाएंगे. पंजाब मुख्यमंत्री नौ नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के दिन सीमा पार करतारपुर साहिब में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.