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अलगाववादियों के नरम पड़े सुर, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए हरसंभव मदद को तैयार

मीरवाइज उमर ने न सिर्फ यह स्वीकार किया कि कश्मीर और कश्मीरी मुस्लिम अपने पंडित भाइयों के बिना अधूरे हैं बल्कि यह भी भरोसा दिया कि हमारी सम्मानपूर्वक व सुरक्षित वापसी के लिए जो जरूरी होगा, वह करेंगे." 

अलगाववादियों के नरम पड़े सुर, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए हरसंभव मदद को तैयार
फाइल फोटो

श्रीनगर: प्रवासी कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए सरकार और सामाजिक स्तर पर प्रयास तेज होने पर अलगावादी हुर्रियत नेता भी कहने लगे हैं कि इसमें मदद के लिए जो आवश्यक होगा, वह करने के लिए वे तैयार हैं. किसी राजनीतिक दल या सामाजिक व धार्मिक समूह का प्रतिधिनित्व नहीं करने का दावा करने वाले सतीश महालदार ने कहा, "मैं हुर्रियत कान्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक से चार जुलाई को मिला. कुछ और प्रवासी (कश्मीरी) पंडित भी साथ थे."

उन्होंने बताया, "मीरवाइज उमर ने न सिर्फ यह स्वीकार किया कि कश्मीर और कश्मीरी मुस्लिम अपने पंडित भाइयों के बिना अधूरे हैं बल्कि यह भी भरोसा दिया कि हमारी सम्मानपूर्वक व सुरक्षित वापसी के लिए जो जरूरी होगा, वह करेंगे." महालदार ने खेद जताते हुए कहा कि वर्षो से कश्मीरी पंडित देश के राजनीतिक पटल पर पिंग पोंग गेंद बने हुए हैं.

उन्होंने कहा, "पूर्व की राजग सरकार के समय से ही हम सुनते आ रहे हैं कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की घर वापसी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है. यह सुनिश्चित करने के लिए असल में जमीनी स्तर पर क्या हुआ? कुछ नहीं, सिवा इसके कि हमें उम्मीदों में रखने के लिए कुछ दिखावटी कदम उठाए गए."उन्होंने कहा, "पंडितों की वापसी प्रदेश और केंद्र सरकारी का अलग से नहीं बल्कि सम्मिलित प्रयास होना चाहिए. चाहे मुस्लिम हो या हिंदू या सिख या बौद्ध, कश्मीरियों का दुख समान है. हम सबको यह समझना होगा."

क्या है कश्मीरी पंडितों का हाल
1989-90 में जब देश में राम मंदिर आंदोलन का जोर था, उस समय कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों पर आतंकवाद का कहर टूटा और बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर चले आए. तब से कश्मीरी पंडितों को लेकर भले ही अन्य मंचों पर चर्चा होती रही हो, लेकिन 2018 में देश की संसद के दोनों सदन लोक सभा और राज्य सभा में कश्मीरी पंडितों की हालत के बारे में किसी सांसद ने सवाल नहीं उठाया.

इस बारे संसद में अंतिम सवाल सितंबर 2017 में पूछा गया था. अगस्त 2017 में लोकसभा में सरकार ने बताया कि 1990 के दशक में घाटी में उग्रवाद शुरू होने के बाद से बड़े पैमाने पर कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन हुआ. इस समय करीब 62,000 कश्मीरी पंडित परिवार जम्मू, दिल्ली और देश के अन्य राज्यों में रह रहे हैं. इनमें से 40,000 परिवार जम्मू और 20,000 परिवार दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं.

इनपुट आईएएनएस से भी