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गणेश चतुर्थी 2020 के मौके पर कश्मीरी पंडितों ने की पान पूजा, जानें- क्या है इसका महत्व

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का पर्व पूरे देश में मनाया गया. हालांकि इस बार कोरोना के चलते बड़े बड़े कार्यक्रम भी आयोजित नहीं हुए.

गणेश चतुर्थी 2020 के मौके पर कश्मीरी पंडितों ने की पान पूजा, जानें- क्या है इसका महत्व
पान पूजा, सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का पर्व पूरे देश में मनाया जा रहा है. हालांकि इस बार कोरोना (Corona) के चलते बड़े कार्यक्रम भी आयोजित नहीं हुए, लेकिन पूरे देश में कश्मीरी पंडितों ने अपने सबसे पवित्र त्योहारों में से एक पान पूजा की रस्मों को निभाया.

पान पूजा के मौके पर कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) देसी घी से रोट नाम का प्रसाद बनाते हैं और ताजे फूलों से भगवान गणेश और बीब गरब माएज माता(Goddess Beeb Garab Maej) की पूजा करते हैं.

पान पूजा का महत्व

विनायक चतुर्थी के दिन पान पूजा का कश्मीरी समाज में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है. ये त्योहार खासतौर पर रुई की नई फसल को लेकर मनाया जाता है, जिसमें विभा और गर्भा नाम की देवियों को रोट चढ़ाया जाता है. इसके बाद सभी में रोट बांटा जाता है. रोट एक तरह से मीठी रोटी या पूरी की तरह का पकवान है, जिसे बनाने में गुड़, पारंपरिक मिठाई का प्रयोग होता है. कश्मीरी पंडितों में मान्यता है कि विभा और गर्भा देवी मिलकर एक हो गईं और बीब गरब माएज में बदल गईं.

इस दिन कश्मीरी पंडित भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं. पान पूजा उत्तरी भारत में होने वाली सत्यनारायण कथा की तरह ही है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे माता बीब गरब माएज की पौराणिक कथा सुनाता है. ये पूजा बेहतर स्वास्थ्य और शांति के लिए भी की जाती है.

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