कठुआ गैंगरेप केस: जम्मू-कश्मीर के DGP बोले, इससे ज्यादा बर्बर कुछ नहीं हो सकता

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में आठ साल की मासूम के साथ हुए गैंगरेप मामले में जम्मू-कश्मीर डीजीपी एसपी वैद का बयान सामने आया है. घटना की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा घृणित और बरबर अपराध कोई नहीं हो सकता है.

कठुआ गैंगरेप केस: जम्मू-कश्मीर के DGP बोले, इससे ज्यादा बर्बर कुछ नहीं हो सकता
जम्मू कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप के आरोपी गिरफ्तार (फोटो-ANI)

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में आठ साल की मासूम के साथ हुए गैंगरेप मामले में जम्मू-कश्मीर डीजीपी एसपी वैद का बयान सामने आया है. घटना की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा घृणित और बरबर अपराध कोई नहीं हो सकता है. आपको बता दें कि इस दिल दहला देने वाली घटना में क्राइम ब्रांच की टीम ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इस केस के तार यूपी के मुजफ्फरनगर से जुड़े हैं. बताया जा रहा है कि एक आरोपी वारदात का हिस्सा बनने के लिए उत्तर प्रदेश से कठुआ पहुंचा था.

जम्मू कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद ने 13 अप्रैल को कठुआ गैंगरेप केस में मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ये एक बर्बर अपराध है. इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता. एसआईटी ने अपना काम अच्छी तरह संभाला और चार्जशीट फाइल की. हमें उम्मीद है कि न्याय होगा.'

क्या है मामला
10 जनवरी को बकरवाल समुदाय के एक परिवार की आठ साल की बच्ची अचानक गायब हो गई थी. उसके लापता होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई गई थी. चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने घोड़े ढूंढने में मदद करने के बहाने लड़की को अगवा कर लिया था. बच्ची को देवीस्थान में बंधक बनाए रखा गया था. उसे बेहोश रखने के लिए नशे की दवाइयां दी गईं. 17 जनवरी को झाड़ियों में बच्ची का शव पाया गया था. मेडिकल जांच में गैंगरेप की पुष्टी हुई. बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने के मामले में मुख्य आरोपी सांजी राम समेत आठ लोगों का आरोपी बनाया गया है.

समुदाय को हटाने की साजिश के तहत वारदात को दिया अंजाम
चार्जशीट में इस बात का खुलासा हुआ है कि बकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण, बलात्कार और हत्या इलाके से इस अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी. इसमें कठुआ स्थित रासना गांव में देवीस्थान, मंदिर के सेवादार को अपहरण, बलात्कार और हत्या के पीछे मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है. सांझी राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा , मित्र परवेश कुमार उर्फ मन्नू , राम का किशोर भतीजा और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा कथित तौर पर शामिल हुए. चार्जशीट में जांच अधिकारी ( आईओ ) हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्त भी नामजद हैं जिन्होंने राम से कथित तौर पर चार लाख रुपये लिए और अहम सबूत नष्ट किए.

ऐसे दिया वारदात को अंजाम
आठ वर्षीय बच्ची 10 जनवरी को लापता हो गई थी जब वह जंगल में घोड़ों को चरा रही थी. जांचकर्ताओं ने कहा कि आरोपियों ने घोड़े ढूंढने में मदद करने के बहाने लड़की को अगवा कर लिया. अपनी बच्ची के लापता होने के अगले दिन उसके माता पिता देवीस्थान गए और राम से उसका अता पता पूछा. जिसपर, उसने बताया कि वह अपने किसी रिश्तेदार के घर गई होगी.

चार्जशीट के मुताबिक आरोपी ने बच्ची को देवीस्थान में बंधक बनाए रखने के लिए उसे अचेत करने को लेकर नशीली दवाइयां दी थी. बच्ची के अपहरण, हत्या और जंगोत्रा एवं खजुरिया के साथ उससे बार - बार बलात्कार करने में किशोर ने मुख्य भूमिका निभाई . किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ चुका है. एक अधिकारी ने बताया कि किशोर की मेडिकल जांच से जाहिर होता है कि वह वयस्क है लेकिन अदालत ने अभी तक रिपोर्ट का संज्ञान नहीं लिया है. 

चार्जशीट के मुताबिक खजुरिया ने बच्ची का अपहरण करने के लिए किशोर को लालच दिया. खजुरिया ने उसे भरोसा दिलाया कि वह बोर्ड परीक्षा पास करने (नकल के जरिये) में उसकी मदद करेगा. इसके बाद उसने परवेश से योजना साझाकर उसे अंजाम देने में मदद मांगी, जो राम और खजुरिया ने बनाई थी. जंगोत्रा अपने चचेरे भाई का फोन आने के बाद मेरठ से रासना पहुंचा और किशोर एवं परवेश के साथ बच्ची से बलात्कार किया, जिसे नशीली दवा दी गई थी. राम के निर्देश पर बच्ची को मंदिर से हटाया गया और उसे खत्म करने के इरादे से मन्नू , जंगोत्रा तथा किशोर उसे पास के जंगल में ले गए.

मौत के घाट उतारने से पहले फिर किया गैंगरेप
जांच के मुताबिक खजुरिया भी मौके पर पहुंचा और उनसे इंतजार करने को कहा क्योंकि वह बच्ची की हत्या से पहले उसके साथ फिर से बलात्कार करना चाहता था. चार्जशीट में कहा गया है कि बच्ची से एक बार फिर सामूहिक बलात्कार किया गया और बाद में किशोर ने उसकी हत्या कर दी. इसमें कहा गया है कि किशोर ने बच्ची के सिर पर एक पत्थर से दो बार प्रहार किया और उसके शव को जंगल में फेंक दिया. दरअसल , वाहन का इंतजाम नहीं हो पाने के चलते नहर में शव को फेंकने की उनकी योजना नाकाम हो गई थी. शव का पता चलने के करीब हफ्ते भर बाद 23 जनवरी के सरकार ने यह मामला अपराध शाखा को सौंपा जिसने एसआईटी गठित की.