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केरल CM मुद्दे पर PMO का हाथ होने के आरोप में विपक्ष का सदन से वाकआउट

केरल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी वाले एक प्रस्तावित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ओमान चांडी को शामिल होने से रोकने के पीछे प्रधानमंत्री कार्यालय का हाथ होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस तथा वामदलों ने इस मामले में प्रधानमंत्री के बयान की मांग की और सदन से वाकआउट किया। हालांकि सरकार ने इसे बेबुनियाद और गलत आरोप करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं समारोह में शामिल होने में अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए कार्यक्रम के आयोजक सामाजिक संगठन को पत्र लिखा है।

नई दिल्ली  : केरल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी वाले एक प्रस्तावित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ओमान चांडी को शामिल होने से रोकने के पीछे प्रधानमंत्री कार्यालय का हाथ होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस तथा वामदलों ने इस मामले में प्रधानमंत्री के बयान की मांग की और सदन से वाकआउट किया। हालांकि सरकार ने इसे बेबुनियाद और गलत आरोप करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं समारोह में शामिल होने में अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए कार्यक्रम के आयोजक सामाजिक संगठन को पत्र लिखा है।

पीएमओ या सत्ता पक्ष में किसी अन्य का इस मामले से कोई लेना देना नहीं होने का दावा करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद में यकीन रखती है और इसे मजबूत करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। गृह मंत्री के बयान से असंतोष जताते हुए कांग्रेस, वामदल, तृणमूल कांग्रेस और राकांपा ने सदन से वाकआउट किया।

कांग्रेस के, के. सी वेणुगोपाल ने शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि सामाजिक संगठन एसएनडीपी द्वारा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री आर शंकर की एक प्रतिमा का अनावरण करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में पहले मुख्यमंत्री को समारोह की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया गया था।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रतिमा का अनावरण करना है लेकिन दो दिन पहले मुख्यमंत्री चांडी को एसएनडीपी के महासचिव वी नटेसन ने समारोह में शामिल नहीं होने को कहा। नटेसन ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि वह इसके कारण का खुलासा नहीं कर सकते।

वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भेजे गए कार्यक्रम के ब्यौरे तथा अन्य प्रोटोकाल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पीएमओ से इस संबंध में पहले किए गए पत्र व्यवहार में मुख्यमंत्री का नाम शामिल था लेकिन दो दिन पहले 12 दिसंबर के पत्र व्यवहार में चांडी का नाम गायब है।