Calcutta High Court lawyer spitting: कलकत्ता हाई कोर्ट में वकील द्वारा थूक से पन्ने पलटने पर न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा भड़क गईं, जिसके बाद ये खबर बाहर आग के तरह फैल गई.
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Calcutta High Court lawyer spitting: कलकत्ता हाई कोर्ट में हाल ही में एक अनोखी घटना सामने आई है, जिसने अदालत और पेशेवर अनुशासन दोनों का ध्यान खींचा. सोमवार को अदालत में एक वकील अपने दस्तावेजों के पन्ने पलटते समय थूक का इस्तेमाल कर रहा था. यह मामला केवल स्वच्छता का नहीं, बल्कि अदालत में मर्यादा और पेशेवर आचार का भी था.
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने जब यह देखा, तो उन्होंने तुरंत नाराजगी जाहिर की. उन्होंने वकील से कहा, "कृपया थूक से पन्ने न पलटें, यह सही नहीं है, यह गंदा है. प्लीज ऐसा न करें." अदालत में मौजूद लोग और कर्मचारी इस इस तरह के दृश्य को देख हैरान रह गए.
कुछ समय बाद वकील ने माफी मांगते हुए कहा, "मुझे खेद है" न्यायमूर्ति ने फिर पूछा, "आपका बैंड कहां है? क्या यह आपका निजी मामला है?" अदालत में वकील अपने कोट के साथ बैंड पहनते हैं, जो पेशेवर अनुशासन का हिस्सा है. वकील ने जवाब दिया कि वह भूल गया था.
न्यायमूर्ति ने कड़ा आदेश दिया, "चले जाइए और पहले अपने हाथ धो लीजिए. नहीं तो मैं अब इस मामले की सुनवाई नहीं करूंगी." वकील ने आदेश का पालन करते हुए हाथ धोए और फिर लौटकर मामले की सुनवाई में हिस्सा लिया.
यह घटना केवल अदालत का अनुशासन ही नहीं, बल्कि पेशेवर स्वच्छता और नैतिकता की भी याद दिलाती है. अदालतों में हर कार्य और व्यवहार का एक निश्चित तरीका होता है. वकील और न्यायाधीश दोनों ही पेशेवर होते हैं और उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य और मर्यादा का ध्यान रखना होता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में स्वच्छता बनाए रखना केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया को सम्मानजनक बनाने के लिए भी जरूरी है. इस घटना ने यह साफ कर दिया कि छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम ला सकती है, और पेशेवर अनुशासन हर जगह महत्वपूर्ण होता है.
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