मोदी सरकार के ये मंत्री 30 साल पहले थे कुलभूषण जाधव के बैचमेट

पाकिस्तान की जेल में कैद कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा का ऐलान किया गया है. उन पर जासूसी के आरोप लगे थे. हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को काफी पहले ही खारिज कर दिया है. ये खबर इन दिनों भारत और पाकिस्तान मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई है. 

मोदी सरकार के ये मंत्री 30 साल पहले थे कुलभूषण जाधव के बैचमेट
कुलभूषण जाधव और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एनडीए में थे बैचमेट

नई दिल्ली : पाकिस्तान की जेल में कैद कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा का ऐलान किया गया है. उन पर जासूसी के आरोप लगे थे. हालांकि भारत सरकार ने इन आरोपों को काफी पहले ही खारिज कर दिया है. ये खबर इन दिनों भारत और पाकिस्तान मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई है. 

कौन हैं कुलभूषण जाधव?

जहां एक ओर कुलभूषण की फांसी को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद पैदा हो गया है, वहीं दोनों देशों की तरफ से इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान भी आ रहे हैं. भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी कई लोग कुलभूषण की फांसी के खिलाफ हैं. 

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कुलभूषण के बारे में आप अब तक काफी बातें जान चुके होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुलभूषण जाधव उस शख्सियत के बैचमेट रहे हैं, जो आज मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं.

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मोदी सरकार के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पाकिस्तान की जेल में कैद कुलभूषण जाधव के बैचमेट रह चुके हैं. बता दें कि राठौड़ ने ओलिंपिक एथेंस में डबल ट्रैप शूटिंग में देश के लिए सिल्वर मेडल जीता था.

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खुद राठौड़ ने इस बात पर मुहर लगाई है कि वे और कुलभूषण 1987 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) में बैचमेट थे. यानी 30 साल पहले दोनों ने एक साथ पुणे में एनडीए ज्वाइन की थी. 

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मोदी सरकार में सूचना-प्रसारण राज्य मंत्री राठौड़ का कहना है, ‘हम एनडीए में बैचमेट थे, इसलिए इस मुद्दे पर बात करना मेरे लिए अनुचित होगा. लेकिन मैं ये कह सकता हूं कि भारत सरकार पाकिस्तान को रोकने के लिए हर संभव राजनयिक और दूसरे कदम उठाएगी. सरकार इस मुद्दे को सही प्लेटफ़ॉर्म पर ले जा रही है.’

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एक साल के कोर्स के बाद 1991 में कुलभूषण जाधव इंडियन नेवी की इंजीनियरिंग शाखा में नियुक्त कर दिए गए थे. वहीं राठौड़ इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से एक साल का कोर्स करने के बाद आर्मी में नियुक्त हुए. 2002 में राठौड़ ने मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद 2004 में एथेंस में सिल्वर मेडल जीता.

बाद में दोनों ने ही समय से पहले आर्मी से रिटायरमेंट ले लिया था. राठौड़ ने साल 2013 में बीजेपी में आने के लिए रिटायरमेंट ले लिया था. तो कुलभूषण ने अपना बिजनेस करने के लिए जॉइन करने के 14 साल के बाद रिटायरमेंट ले लिया था.

कुलभूषण को ईरान के चाबहार में अपना व्यापार करना था. वो ईरान में ही अपना छोटा सा व्यापार चला रहे थे, वहीं से पिछले साल पाकिस्तानी एजेंसियों ने कुलभूषण का अपहरण कर लिया, जिन्हें आज जासूस बनाकर पेश किया जा रहा है.