LAC पर तनाव के बीच भारत-चीन के कमांडरों की छठी मीटिंग इस मायने में है 'खास'

 भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने और सैनिकों की वापसी पर दोनों देशों के बीच बनी पांच सूत्रीय सहमति को लागू करने के लिए सोमवार (21 सितंबर) को मीटिंग की.

LAC पर तनाव के बीच भारत-चीन के कमांडरों की छठी मीटिंग इस मायने में है 'खास'

नई दिल्लीः भारत चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर जो बातचीत आज हो रही है उसमें विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हैं. विदेश मंत्रालय की तरफ से पहली बार कोई अधिकारी इस बातचीत में शामिल हुआ है, इसके कई मायने हैं. पहला तो यह कि दोनों देशों के विदेश मंत्री रूस में जब मिले थे तो दोनों देशों के बीच पांच बिंदुओं पर सहमति बनी थी जिसमें प्रमुख बिंदु था कि डिसएंगेजमेंट को लेकर दोनों देश गंभीरता दिखाएंगे.

 सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत में भारत की तरफ से बिल्कुल स्पष्ट  संदेश चीन को दिया जाएगा कि आखिर इस disengagement के लिए चीन को क्या-क्या करना है.  भारत इस बैठक से कुछ ठोस समाधान चाहता है लिहाजा यही वजह है कि विदेश मंत्रालय की तरफ से भी एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है जो सहमति के तमाम बिंदुओं को रखेगा.

दरअसल, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में यह भी तय हुआ था कि दोनों ही देश पूर्व में हुए समझौतों का पालन करेंगे और उनका सम्मान करेंगे. लिहाजा पूर्व के समझौते क्या-क्या हैं और चीन को कैसे इन समझौतों को तोड़ा है इन समझौतों का सम्मान करने के लिए उसको क्या-क्या करना चाहिए इन तमाम विषयों को लेकर भी विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है. सीधे शब्दों में कहे तो कमांडर लेवल की बातचीत में अधिक से अधिक ठोस परिणाम हासिल किया जा सके इसके लिए भारत सरकार ने ये रणनीति अपनाई है.

कमांडर लेवल की बातचीत में राजनयिक और आर्मी HQ के सीनियर ऑफिसर के रहने के फायदे-

1. मास्को में दोनों विदेश मंत्रियों के बीच पांच बिंदुओं पर बनी सहमति को  जमीन पर लागू करवाने का प्रयास

2. संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव WMCC की मीटिंग को लीड करते रहे हैं. विदेश मंत्रालय में चीन डेस्क के प्रभारी हैं. सीमा विवाद को लेकर सबसे ज्यादा अपडेट उनके पास है.

3.कमांडर स्तर की  बातचीत में इनके रहने से बातचीत को हैंडल करने में मदद मिलेगी

4. इस बातचीत को लेकर हम गंभीरता से कोशिश कर रहे है , इसका भी प्रमाण है.

5.जरूरत पड़ने पर बातचीत के दौरान ऑन स्‍पॉट फैसले लिए जा सकेंगे.

6. LAC पर तनाव घटने से एक माहौल बनेगा ताकि निकट भविष्य में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात हो सके.

पहले और अब की बातचीत में अंतर है कि अब भारत के पास भी LAC पर कई पोजिशन ऐसी है जिससे चीन परेशान है. इससे पहले जब कमांडर लेवल की बातचीत होती थी तो हम केवल चीन से ये कहते थे कि आप यथास्थिति बहाल करें और अप्रैल 2020 की पोजिशन पर जाएं. हालांकि आज की बातचीत को "कमांडर लेवल" की बातचीत का नाम दिया गया है लेकिन इसमें दोनोंं पक्ष की तरफ़ से शामिल डेलिगेशन WMCC जैसा स्वरूप है.