क्या भारत- चीन में सुलझेगा लद्दाख विवाद? आज दोनों देशों में हो रही है ये बड़ी बैठक

भारत और चीन के बीच अब तक के सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ चीनी इलाके के मॉल्डो में सोमवार की सुबह चर्चा शुरू हो गई है. भारत के इस प्रतिनिधिमंडल में दो लेफ्टिनेंट जनरल, दो मेजर जनरल, चार ब्रिगेडियर, आईटीबीपी के एक आईजी के अलावा विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव शामिल हैं.

क्या भारत- चीन में सुलझेगा लद्दाख विवाद? आज दोनों देशों में हो रही है ये बड़ी बैठक
फाइल फोटो

नई दिल्ली: भारत और चीन (India- China) के बीच अब तक के सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ चीनी इलाके के मॉल्डो (Moldo) में सोमवार की सुबह चर्चा शुरू हो गई है. भारत के इस प्रतिनिधिमंडल में दो लेफ्टिनेंट जनरल, दो मेजर जनरल, चार ब्रिगेडियर, आईटीबीपी के एक आईजी के अलावा विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव शामिल हैं. इस चर्चा में पहली बार विदेश मंत्रालय का कोई प्रतिनिधि शामिल हो रहा है.  

कोर कमांडर (Corps Commander) स्तर की इस छठी चर्चा में भारत पूरे इलाक़े से चीनी सैनिकों के पीछे हटने पर जोर दे रहा है. ऐसी पिछली बैठक के बाद पिछली चर्चा के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तनाव बहुत बढ़ गया है. 29-30 अगस्त को भारतीय सेना ने कार्रवाई करते हुए एलएसी पर रणनैतिक महत्व की कई चोटियों पर कब्ज़ा कर लिया. ये सभी इलाक़े पेंगांग झील के पूर्वी किनारे पर ठाकुंग से लेकर रेज़ांग ला तक हैं. 

चीनी सेना ने 7 सितंबर को चीनी सेना ने चुशूल की मुखपरी चोटी पर दोबारा कब्ज़े की कोशिश की और इस दौरान गोलियां भी चलीं. हालांकि दोनों ही पक्षों ने गोली चलाने का आरोप एक-दूसरे पर लगाया है. लेकिन 1967 के बाद पहली बार भारत-चीन की सेनाओं के बीच गोलियां चलने से तनाव चरम पर पहुंच गया. इस बीच दोनों ही देशों के रक्षामंत्री और विदेश मंत्रियों के बीच मास्को में बैठकें हुईं लेकिन अभी भी दोनों ही देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने 
तैनात हैं. 

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर ले.जनरल हरिंदर सिंह के अलावा दिल्ली से आए ले. जनरल पीजीके मेनन भी शामिल हैं. जनरल मेनन अ्क्टूबर में लेह कोर की कमान संभालेंगे, वर्तमान कोर कमांडर जनरल हरिंदर सिंह का कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त हो रहा है. इसके दो डिवीज़न कमांडर, चार ब्रिगेडियर भी इस प्रतिनिधिमंडर का हिस्सा हैं. 

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विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं जो इस विवाद को सुलझाने के  लिए बनाए गए वर्किंग मैकेनिज़्म का हि्स्सा रहे हैं. नवीन श्रीवास्तव ईस्ट एशिया के मामलों को देखते हैं और हाल में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल थे. 

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