Ladakh China Border: भारत ने एक नया एयरबेस न्योमा में शुरू किया है. यह एयरबेस पूर्वी लद्दाख में है. इस कदम से भारत की फौज की ताकत बढ़ गई है. अब सैनिक और जरूरी सामान जल्दी और आसानी से आ-जा सकेंगे. इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में सेना एक बड़ा अभ्यास कर रही है जिसका नाम है पूर्वी प्रचंड प्रहार.
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Ladakh China Border Activated: भारत ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख में चीन की सीमा के पास 'न्योमा' नाम का एक नया एयरबेस शुरू कर दिया है. इससे इस इलाके में सेना की ताकत और क्षमता बढ़ गई है. दूसरी तरफ अरुणाचल प्रदेश में सेना पूर्वी प्रचंड प्रहार नाम का एक बड़ा अभ्यास कर रही है. ये दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि भारत चीन सीमा पर पूरी तरह से तैयार और चौकस है. एक अधिकारी ने बताया कि भले ही सेना इतनी तैयारी कर रही है पर भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंध(Diplomatic Relations)धीरे-धीरे बेहतर हो रहे हैं.
विश्वास की कमी और सैनिकों की तैनाती
भारत और चीन के बीच सेना के स्तर पर विश्वास बढ़ाने के लिए बातचीत लगातार हो रही है लेकिन जमीनी स्तर पर सैनिकों के बीच अभी भी भरोसा कम है. अधिकारी ने बताया कि LAC पर तनाव अभी भी बना हुआ है. इसलिए अप्रैल-मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा की गई कई घुसपैठों के बाद से यह छठी बार होगा जब सैनिक लगातार सर्दियों में भी आगे की चौकियों पर तैनात रहेंगे.
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न्योमा एयरबेस का बड़ा सुधार
न्योमा एयरबेस को बेहतर बनाने में 230 करोड़ रुपए लगे हैं. यह चीन की सीमा(LAC)से सिर्फ 35 किलोमीटर की दूरी पर है. भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद दिल्ली के हिंडन से C-130J Super Hercules विमान उड़ाकर न्योमा तक की उड़ान भरी. न्योमा में यह हवाई अड्डा 13,170 फीट की ऊंचाई पर है जो इसे दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस में से एक बनाता है.
क्या हुआ सुधार कार्य?
पुरानी हवाई पट्टी को बढ़ाकर 2.7 किलोमीटर लंबा और मजबूत रनवे बनाया गया है, एक नया ATC कॉम्प्लेक्स, हैंगर, क्रैश बे और सैनिकों के लिए आवास भी बनाए गए हैं. उद्घाटन के समय उनके साथ पश्चिमी वायु कमान प्रमुख एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भी मौजूद थे.
इससे क्या फायदा होगा?
न्योमा एयरबेस अब दोनों तरफ से बड़े माल ढोने वाले विमाना और लड़ाकू विमानों को उतारने और संभालने में पूरी तरह से सक्षम है. इसका सबसे बड़ा फायदा होगा कि पूर्वी लद्दाख के जैसे पैंगोंग त्सो, डेमचोक, और देपसांग जैले इलाकों में सैनिकों, हथियारों और बाकी जरूरी सामानों को बहुत ज्लद पहुंचाया जा सकेगा. यह एयरबेस 2026 की शुरुआत से लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल के लिए भी तैयार हो जाएगा.
कैसी है चीन की हवाई तैयारी?
पिछले 5 सालों में चीन ने भारत की सीमा के पास वाले अपने सभी हवाई अड्डों को बहुत बेहतर बनाया है. यह सुधार इसलिए किया गया है जिससे ज्यादा ऊंचाई और कम हवा की वजह से आने वाली मुश्किलों को दूर किया जा सके. दरअसल, ऊंचाई पर विमानों की हथियार और ईंधन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है. चीन के पास अब J-10 Stealth Fighter Jet जैसे कई आधुनिक विमान हैं जिसमें फाइटर जेट, बम गिराने वाले बॉम्बर, जासूसी विमान और ड्रोन शामिल हैं.
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चीन की तैयारी और भारत का अभ्यास
चीन ने LAC पर कई नए हेलीपोर्ट भी बनाए हैं. भारतीय सेना की 3 स्पीयर कोर के हजारों सैनिक, वायुसेना, ITBP और अन्य के साथ मिलकर अरुणाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में एक बहुत बड़ा अभ्यास कर रहे हैं. अभ्यास में हवा से सैनिकों को लाना-ले-जाना, पहाड़ों में युद्ध की ट्रेनिंग, तेजी से हरकत करना, जरूरी सामानों को पहुंचाना और सटीक हमला करने की क्षमता को पक्का करना शामिल है.