Pune Land Scam News: महाराष्ट्र के पुणे में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है. आरोप है कि 1800 करोड़ रुपये की जमीन महज 300 करोड़ रुपये में बेच दी गई और इस पर स्टांप ड्यूटी भी महज 500 रुपये चुकाई गई.
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'Parth Pawar Deal' News: पुणे का 'रियल एस्टेट घोटाला' अब सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में तूल पकड़ चुका है. यह वही राज्य है जहां राजनीति और कारोबारी हित हमेशा एक-दूसरे से गहराई से जुड़े रहे हैं. लेकिन इस बार मामला उस परिवार से जुड़ा है, जिसने दशकों से महाराष्ट्र की सत्ता का समीकरण तय किया है और वह है पवार परिवार.
40 एकड़ की ‘सस्ती’ डील और 500 रुपए की स्टांप ड्यूटी!
नेटवर्क 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे के कोरेगांव पार्क जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके में करीब 40 एकड़ की प्राइम लैंड की कीमत बाजार में लगभग 1,800 करोड़ आंकी जा रही है. हालांकि दस्तावेजों में यह जमीन महज 300 करोड़ में बेची गई बताई जा रही है. हैरानी की बात ये है कि इस सौदे पर स्टांप ड्यूटी मात्र 500 रुपये ही चुकाई गई. इस घोटाले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. इसकी वजह ये है कि इस डील का लिंक महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जोड़ा जा रहा है.
फडणवीस ने दिखाई सख्ती, दो अफसर सस्पेंड
जैसे ही यह खबर मीडिया में आई, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल एक्शन मोड में आते हुए पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत येवले को निलंबित कर दिया. इसके बाद डिप्टी रजिस्ट्रार रविंद्र तारु पर भी गाज गिरी. सीएम फडणवीस ने साफ कहा, 'अगर कोई भी अनियमितता पाई गई, तो कार्रवाई तय है. कानून सबके लिए समान है.'
राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खाड़गे की अध्यक्षता में हाई लेवल जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की है.
शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की प्राथमिक जांच के अनुसार, यह सौदा कानूनी मानदंडों का उल्लंघन करते हुए हुआ है.
जमीन की असली वैल्यू छिपाने के लिए अंडरवैल्यूएशन की रणनीति अपनाई गई. डील में कई जरूरी सरकारी अनुमति और एसेसमेंट को भी दरकिनार किया गया. इससे न केवल राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान हुआ बल्कि मूल जमीन मालिकों को भी आर्थिक क्षति पहुंची.
पहले भी विवादों में घिर चुके हैं अजित पवार
इस घोटाले के केंद्र में आए अजित पवार महाराष्ट्र के अनुभवी और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं. वे पहले भी सिंचाई घोटाला जैसे विवादों में घिर चुके हैं. लेकिन इस बार मामला उनके बेटे पार्थ से जुड़ने के कारण और भी संवेदनशील बन गया है. पार्थ पवार पहले भी राजनीति में एंट्री की कोशिश कर चुके हैं. उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में मावलगांव सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे. अब कारोबारी फ्रंट पर उनका नाम आने से विपक्ष को हमला बोलने का नया मौका मिल गया है.
विपक्ष का हमला - ये परिवारवाद नहीं प्रॉपर्टीवाद
कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने इस डील को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है. शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा, 'जब बेटा डिप्टी सीएम का हो और डील 1,800 करोड़ की जमीन की हो, तो जांच सिर्फ दिखावा नहीं होनी चाहिए.' वहीं कांग्रेस ने इसे राज्य की सबसे बड़ा जमीन घोटाला बताते हुए कहा कि अगर सरकार वाकई ईमानदार है तो सीबीआई जांच करवाए.
बीजेपी के लिए ‘डबल चैलेंज’
यह मामला बीजेपी के लिए भी असहज है. क्योंकि अजित पवार अब महायुति सरकार के हिस्से हैं. ऐसे में उनके परिवार पर कार्रवाई करने से गठबंधन पर असर पड़ सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फडणवीस संतुलन साधने की कोशिश में हैं. एक ओर उन्हें पारदर्शिता दिखानी है, दूसरी ओर गठबंधन की स्थिरता भी बनाए रखनी है.
घोटाले पर क्या बोल रही जनता?
सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई यूज़र्स ने लिखा, एक आम नागरिक अगर 10 लाख की जमीन खरीदता है तो हजारों की स्टांप ड्यूटी भरनी पड़ती है. वहीं अरबों की लैंड डील सिर्फ 500 रुपये में कर दी गई? ऐसे में यह मामला सिर्फ एक पॉलिटिकल स्कैंडल नहीं, बल्कि ‘सिस्टम की साख’ का सवाल भी बन चुका है.
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति क्या निष्कर्ष देती है. इस घोटाले पर अजित पवार और पार्थ पवार क्या सफाई देते हैं. साथ ही क्या इस बार महाराष्ट्र की राजनीति में सचमुच जमीन के नीचे की सच्चाई बाहर आएगी.