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UPA की तुलना NDA सरकार में कम दर्ज हुई राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में शिकायतें

सरकार ने संसद को बताया कि देश में यूपीए सरकार के मुकाबले एनडीए सरकार में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में आने वाली शिकायतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. 2014 में मोदी सरकार(पार्ट 1) बनने के बाद से ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में आने वाली शिकायतें कम हो गयी और 2018-19 तक इनमें गिरावट ही दर्ज की गई. 

UPA की तुलना NDA सरकार में कम दर्ज हुई राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में शिकायतें
लिंचिंग की खबरों के बीच एनडीए सरकार के लिए आई एक अच्छी खबर.

नई दिल्ली: एक तरफ मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों को लेकर देशभर में राजनीति गरमाई हुई है, वहीं सरकार ने संसद को बताया कि देश में यूपीए सरकार के मुकाबले एनडीए सरकार में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में आने वाली शिकायतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. 2014 में मोदी सरकार(पार्ट 1) बनने के बाद से ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में आने वाली शिकायतें कम हो गयी और 2018-19 तक इनमें गिरावट ही दर्ज की गई. 

सांसद एनके प्रेमचंद्र के सवाल पर अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने बताया कि 2011-12 में 2439 शिकायतें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में दर्ज की गई. 2012 -13 में 2127 शिकायतें आई वही 2013 -14 में 2637 दर्ज की गई. 2014 में मोदी सरकार बनी और 2014 -15 में 1995 शिकायतें दर्ज की गई. वही 2015 -16 में 1974, 2016- 17 में 1647,  2017- 18 में 1497 और 2018-19 में1871 शिकायतें दर्ज की गई.

2014 के बाद से कम शिकायतें आने के मामले को लेकर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चयरमैन गय्यरुल हसन कहते हैं, सरकार में लोगों का विश्वास बढ़ा हैं. शिकायतों का कम आना बताया है कि निचले स्तर पर अल्पसंख्यक समाज के लोगों को इंसाफ मिल रहा है. गय्यरुल हसन कहते हैं, कि उनके पास लड़ाई झगड़ो से लेकर प्रशासनिक न इंसाफी तक के तमाम मामले आते हैं लेकिन कम होती शिकायतें बता रही है कि ज़मीन पर हालात बदले है.

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हालांकि विपक्ष इन आंकड़ों को लेकर अपना नज़रिया रखता है. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैय्यद नसीर हुसैन कहते है, कि लोगों को इस सरकार में विश्वास ही नहीं कि उन्हें इंसाफ मिलेगा. मॉब लिंचिंग के मामले बढ़ रहे है ये सबके सामने है.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के आकंडो को देखने का सरकार और विपक्ष दोनों का अपना अपना नज़रिया है, लेकिन आंकड़ों का सच यही है कि शिकायतें पिछले कुछ सालों में कम हुई है.