20 विश्‍वविद्यालयों को बनाएंगे वर्ल्‍ड क्‍लास, 5 सालों में 10 हजार करोड़ देंगे: PM नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जदयू के राजग गठबंधन में लौटने के बाद शनिवार को पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मंच साझा किया.

20 विश्‍वविद्यालयों को बनाएंगे वर्ल्‍ड क्‍लास, 5 सालों में 10 हजार करोड़ देंगे: PM नरेंद्र मोदी

पटना: पटना यूनिवर्सिटी के शताब्‍दी समारोह में बोलते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि मैं देश का पहला प्रधानमंत्री हूं कि जो पटना यूनिवर्सिटी आया है. इसके साथ ही मुस्‍कुराते हुए कहा कि मुझसे पहले जो प्रधानमंत्री हुए हैं, वे मेरे जिम्‍मे कई अच्‍छे काम छोड़ गए हैं.  पीएम मोदी ने कहा कि 100 साल में कई पीढि़यां पटना यूनिवर्सिटी के जरिये आगे बढ़ीं. हर राज्‍य में सिविल सेवा के वरिष्‍ठ पदों पर ऐसे अधिकारी हैं जिन्‍होंने पटना यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्‍य दिमाग को खाली करना, खोलना है. चुनौती ये नहीं है कि नया क्‍या सीखा, बल्कि यह है कि पुराना जो सीखा, उसको भुलाया जाए. हम नया सीखने पर जितना जोर देंगे, उतना ही वैश्विक रूप से हमारा देश मजबूत होगा. बिहार एक ऐसा राज्‍य है, जहां ज्ञान और गंगा दोनों है. इस धरती की अनोखी विरासत है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के एक भी विश्वविद्यालय के विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में नहीं होने पर अफसोस जताते हुए शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार थर्ड पार्टी द्वारा चयनित देश के शीर्ष 20 विश्वविद्यालयों (टॉप 10 निजी विश्वविद्यालय और टॉप 10 सरकारी विश्वविद्यालय) को सरकारी बंधनों से स्वतंत्र करते हुए विश्व स्तरीय बनाने के लिए उन्हें अगले पांच साल के दौरान 10 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगी.

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पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ जोड़कर इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने के आग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका मानना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बीते हुए कल की बात है, मैं उससे एक कदम आगे ले जाना चाहता हूं और उसी का निमंत्रण देने के लिए इस कार्यक्रम में भाग लेने आया हूं.

उन्होंने कहा, ''हमारे देश में शिक्षा क्षेत्र के सुधार बहुत मंद गति से चले हैं. हमारे शिक्षाविदों में भी आपसी मतभेद बड़े तीव्र रहे हैं और बदलाव से ज्यादा समस्याओं को उजागर करने के कारण बने हैं तथा उसी का परिणाम रहा है कि लंबे अरसे तक हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था में और खासतौर पर उच्च शिक्षा में बदलते हुए विश्व की बराबरी करने के लिए जो नवाचार एवं सुधार चाहिए, सरकारें उसपर कुछ कम पड़ गईं हैं.

मोदी ने अपनी सरकार के बारे कहा कि इस सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं और हिम्मत दिखाई है. पहली बार देश में आईआईएम को पूरी तरह सरकारी कब्जे से बाहर निकालकर प्रोफेशनली उसे ओपेन अप कर दिया है. यह बहुत बड़ा फैसला किया है.

उन्होंने कहा, ''हम सेंट्रल यूनिवर्सिटी से एक कदम आगे जाना चाहते हैं और मैं पटना विश्वविद्यालय को उस एक कदम आगे ले जाने के लिए निमंत्रण देने आया हूं. भारत सरकार ने देश के विश्वविद्यालयों के लिए एक सपना प्रस्तुत किया है . विश्व के 500 टॉप विश्वविद्यालयों में हिंदुस्तान का कहीं नामोनिशान नहीं है.'' 

प्रधानमंत्री ने कहा, ''​जिस धरती पर नालंदा, विक्रमशिला, तक्षशिला आदि जैसी यूनिवर्सिटी... कोई 1300, 1500 अथवा 1700 साल पहले विश्व को आकर्षित करती थीं. क्या वह हिंदुस्तान दुनिया की 500 यूनर्विसिटी में कहीं न हो यह मिटाना चाहिए या नहीं . यह स्थिति बदलनी चाहिए या नहीं. क्या कोई बाहर वाला आकर बदलेगा. हमें ही बदलना होगा. सपने, संकल्प और सिद्धि के लिए पुरूषार्थ भी हमारे होने चाहिए. इसी मिजाज से एक योजना भारत सरकार लायी है और वह योजना है देश की दस प्राइवेट युनिवर्सिटी (निजी विश्वविद्यालय) तथा देश की दस पब्लिक यूनिवर्सिटी ( सार्वजनिक विश्वविद्यालय), कुल 20 विश्वविद्यालयों को वर्ल्ड क्लास बनाने की तथा सरकार के बंधन, कानून और नियम से उन्हें मुक्ति दिलाने की. आने वाले पांच सालों में इन विश्वविद्यालयों को दस हजार करोड़ रूपये देंगे.''

मोदी ने कहा, ''इन विश्वविद्यालयों का चयन किसी नेता, प्रधानमंत्री की इच्छा एवं मुख्यमंत्री की चिट्ठी और सिफारिश से नहीं होगा बल्कि पूरे देश के विश्वविद्यालयों को चैलेंज रूट में निमंत्रित किया गया है. उस चैलेंज रूट में हर किसी को आना होगा. टॉप टेन प्राइवेट यूनिवर्सिटी और टॉप टेन पब्लिक यूनिवर्सिटी का एक थर्ड पार्टी प्रोफेशनल एजेंसी द्वारा चैलेंज रूट में सलेक्शन होगा.'' 

उन्होंने कहा कि टॉप 20 में आने वाले विश्वविद्यालयों को सरकार के नियमों और बंधनों से मुक्त करके स्वतंत्रता दी जाएगी. इस काम के लिए पांच साल के भीतर उन्हें दस हजार करोड़ रूपये दिए जाएंगे. मोदी ने कहा कि यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने से कई गुना आगे है. यह एक बहुत बड़ा मौका है और पटना यूनिवर्सिटी को पीछे नहीं रहना चाहिए. यही ​निमंत्रण देने के लिए मैं आपके पास आया हूं.