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लुधियाना नगर निगम चुनाव: कांग्रेस की जीत में ये रहीं 5 अहम वजहें

95 वार्डों में से बीजेपी-शिअद गठजोड़ में से बीजेपी को 10 और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को 11 सीटें मिली हैं.

लुधियाना नगर निगम चुनाव: कांग्रेस की जीत में ये रहीं 5 अहम वजहें
लुधियाना नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को जालंधर, पटियाला और अमृतसर के बाद एक बार फिर बड़ी जीत मिली है. लिहाजा कांग्रेस, लुधियाना में भी अब अपना मेयर बनाने को तैयार है.(फाइल फोटो)

लुधियाना नगर निगम चुनावों में कांग्रेस को दमदार जीत मिली है. कांग्रेस को 62 सीटों और बीजेपी-शिअद को 21 सीटें मिली हैं. विधानसभा चुनावों में दूसरे नंबर पर रही आम आदमी पार्टी (आप) को महज एक सीट से संतोष करना पड़ा है. कुल 95 वार्डों में से लोक इंसाफ पार्टी को सात और निर्दलीय प्रत्‍याशियों को चार सीटों पर कामयाबी मिली है. बीजेपी-शिअद गठजोड़ में से बीजेपी को 10 और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को 11 सीटें मिली हैं. इस संदर्भ में कांग्रेस की जीत की 5 अहम वजहों पर एक आइए डालते हैं एक नजर:  

1. पिछले साल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्‍व में एक दशक बाद जबर्दस्‍त ढंग से सत्‍ता में वापसी की थी. इन नतीजों के बाद माना जा रहा है कि अभी सूबे में कांग्रेस और कैप्‍टन का जलवा बरकरार है. कांग्रेस की लहर पर ज्‍यादा असर नहीं पड़ा है. लुधियाना नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को जालंधर, पटियाला और अमृतसर के बाद एक बार फिर बड़ी जीत मिली है. लिहाजा कांग्रेस, लुधियाना में भी अब अपना मेयर बनाने को तैयार है.

लुधियाना नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की बंपर जीत, बीजेपी-शिअद गठबंधन को करारी शिकस्त

2. निकाय चुनाव प्रचार अभियान के दौरान अकाली दल, बीजेपी और आप ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस द्वारा जारी घोषणापत्र के वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया था. नतीजों से साफ है कि लोगों ने उनकी बात पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया और एक बार फिर कैप्टन सरकार पर अपना भरोसा दिखाते हुए लुधियाना को तीन शहरों के बाद चौथा कांग्रेसी मेयर दिया है.

3. कांग्रेस ने सकारात्‍मक प्रचार अभियान चलाया. उसने सोशल मीडिया पर यह अभियान चलाया कि सरकार अपनी, MP अपना विधायक अपना तो पार्षद भी अपना होना चाहिए. इन नतीजों को देखकर ऐसा लगता है कि जनता ने उनकी इस बात पर मुहर लगाई.

4. कैप्टन सरकार ने नगर निगम चुनावों में महिलाओं को 50% सीटें दी थीं. इसके अलावा कैप्‍टन ने युवाओं को भी भरपूर तरजीह दी. इसका फायदा नतीजों के रूप में कांग्रेस को देखने को मिल रहा है.

5. पिछले दिसंबर में अमृतसर, पटियाला और जालंधर कारपोरेशन जीतने के साथ ही कांग्रेस ने 29 में से 20 नगरपालिका परिषद और नगर पंचायत में अपना परचम लहराया था. उससे पहले कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्‍व में कांग्रेस ने 117 में से 77 विधानसभा सीटें जीतकर शिअद-बीजेपी से सत्‍ता हासिल की थी. इन नतीजों से साफ है कि कांग्रेस की पकड़ पंजाब में बरकरार है.