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5 सितंबर की रैली को लेकर बोले अलागिरी, 'करुणानिधि का बेटा हूं, जो कहा है, करूंगा'

एम. करूणानिधि को श्रद्धांजलि देने के लिए एमके अलागिरी 5 सितंबर को मौन रैली का आयोजन कर रहे हैं. 

5 सितंबर की रैली को लेकर बोले अलागिरी, 'करुणानिधि का बेटा हूं, जो कहा है, करूंगा'
(फाइल फोटो)

मदुरै : तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के बेटे एमके अलागिरी के विरोध के स्वर फूटने लगे हैं. अलागिरी 5 सितंबर को एक मौन रैली करने जा रहे हैं, इस रैली को डीएमके के लिए खतरे की घंटी बताई जा रही है. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) से निष्कासित नेता एमके अलागिरी ने कहा कि वह चेन्नई में पांच सितम्बर को प्रस्तावित रैली के लिए आगे बढ़ेंगे. जब उनसे उनके दिवंगत पिता एम. करूणानिधि को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी प्रस्तावित मौन रैली के बारे में पूछा गया तो अलागिरी ने कहा, ‘मैं थलैवर (एम करूणानिधि) का पुत्र हूं, इसलिए मैं वहीं करूंगा जो मैंने कहा है.’ 

गौरतलब है कि करूणानिधि का गत सात अगस्त को निधन हो गया था. पार्टी में उन्हें फिर से शामिल किए जाने के उनके अनुरोध पर द्रमुक की चुप्पी पर अलागिरी ने हालांकि कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. अलागिरी, करूणानिधि की मौत के बाद से यह दावा करते रहे है कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता उनके साथ हैं. उन्होंने कहा था कि रैली के बाद डीएमके को खतरे का सामना करना पड़ेगा.

अलागिरी ने डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के नेतृत्व को स्वीकार करने की इच्छा जताई थी. बता दें कि पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर एम के स्टालिन के साथ हुए विवाद के बाद करूणानिधि ने अलागिरी और उनके समर्थकों को 2014 में पार्टी से निष्कासित कर दिया था.

वापस नहीं लिया तो अपनी ही कब्र खोदेगी पार्टी
बता दें कि करुणानिधि के निधन के बाद से ही उनके परिवार में एक बार फिर उत्तराधिकार का विवाद पैदा हो गया था. करुणानिधि के अंतिम संस्कार के दौरान ही अलागिरी ने अपने छोटे भाई और पार्टी के कार्यकारी अध्‍यक्ष स्टालिन को जमकर कोसा था. उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने पिता की समाधि पर प्रार्थना की और अपनी शिकायतें सामने रखीं जिसे मीडिया फिलहाल नहीं जान पाएगा.

अलागिरी ने स्टालिन पर आरोप लगाया था कि वह पार्टी में उनके लौटने की राह में रोड़े अटका रहे हैं और पार्टी के पदों को बेच रहे हैं. इसके साथ ही एमके अलागिरी ने दावा किया कि पार्टी के सभी वफादार कार्यकर्ता उनके साथ हैं और यदि द्रमुक ने उन्हें वापस नहीं लिया तो वह ‘अपनी ही कब्र खोदेगी.’

(इनपुट भाषा से)