भगवान राम की माता कौशल्या की जन्मतिथि बताने वाले को मिलेगा 11 लाख का इनाम

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 30 किमी दूर चंदखुरी में भगवान राम की माता कौशल्या का इकलौता मंदिर है.

भगवान राम की माता कौशल्या की जन्मतिथि बताने वाले को मिलेगा 11 लाख का इनाम
माना जाता है कि ये जगह माता कौशल्या का जन्मस्थान है और भगवान राम का ननिहाल है.

रायपुर: दूधाधारी मठ के महंत रामसुन्दर दास ने भगवान श्रीराम की माता कौशल्या की जन्मतिथि बताने वाले को 11 लाख का पुरस्कार देने की घोषणा की है. प्राप्त प्रमाण, पुरातत्व की खुदाई, प्राचीन ग्रन्थों, जनश्रुति, क्षेत्रीय दंतकथाओं आदि के अलावा ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी विद्वानों को व ज्योतिष गणना आदि के द्वारा भगवान राम की कुंडली के चतुर्थ भाव (मातृ भाव) के आधार पर माता कौशल्या की जन्मतिथि के निर्धारण और जन्मकुंडली तैयार करने के लिए दूधाधारी मठ के महंत रामसुन्दर दास ने आमंत्रित किया. दूधाधारी मठ के पते पर जन्मतिथि के संबंध में प्रमाणिक दावा 15 दिसंबर तक भेजा जा सकता है. 

विद्वानों से प्राप्त प्रस्ताव को चयनित विशेषज्ञ जजों (जूरी) द्वारा प्रमाणित किया जायेगा. प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्वान को नगद राशि 11 लाख रुपये और विशेष सम्मान पत्र प्रदान किया जायेगा. बता दें कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 30 किमी दूर चंदखुरी में भगवान राम की माता कौशल्या का इकलौता मंदिर है. माना जाता है कि ये जगह माता कौशल्या का जन्मस्थान है और भगवान राम का ननिहाल है. बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराने जा रही है.

कौन हैं महंत रामसुंदर दास
महंत रामसुंदर दास का जन्म जांजगीर-चांपा जिले के पिहरीद गांव में हुआ था. शुरुआती पढ़ाई के बाद वे रायपुर आ गए और यहां ऐतिहासिक दूधाधारी मठ में रहकर आगे की पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक कार्यों में जुट गए. रामसुंदर के ज्ञान और निस्वार्थ भावना से तत्कालीन महंत वैष्णवदास बहुत प्रभावित हुए और आगे चलकर उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. वैष्णवदास के देहांत के बाद से रामसुंदर दास महंत के रूप में मठ का संचालन कर रहे हैं. महंत रामसुंदर दास ने संस्कृत में एमए और साहित्य आचार्य की उपाधि ली है और 'रामायणकालीन ऋषि-मुनियों का तुलनात्मक अध्ययन' विषय पर पीएचडी भी की है.