MP के 20 फीसदी किसान हो सकते हैं फसल बीमा से वंचित, जानिए पूरा मामला

मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश के चलते खराब हुई फसलों का दर्द किसान के माथे पर चिंता की गहरी लकीरों का सबब बन गया है.

MP के 20 फीसदी किसान हो सकते हैं फसल बीमा से वंचित, जानिए पूरा मामला
बैतूल जिले के करीब 16 हजार किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत बीमा क्लेम का डाटा ही बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड नही हो सका है.

इरशाद हिंदुस्तानी/बैतूल: मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि का शिकार किसान एक बार फिर व्यवस्था की खामियों का शिकार हो रहा है. दरअसल, बैतूल जिले के करीब 16 हजार किसानों का फसल बीमा ही नहीं हो सका है. इससे जहां किसान चिंतित हैं. वहीं, अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है. हैरानी की बात तो यह है कि फसल बीमाविहीन ऐसे किसानों की बड़ी तादाद पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे के इलाके की है. जहां सोसाइटियों ने किसानों की बीमा की रकम तो काट ली है लेकिन, पोर्टल पर इसकी इंट्री नही हो सकी है. सीसीबी इसे दुरुस्त करवाने का दावा कर रही है. वहीं, बीजेपी नेता इसे किसानों के साथ धोखा बता रहे हैं.

मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश के चलते खराब हुई फसलों का दर्द किसान के माथे पर चिंता की गहरी लकीरों का सबब बन गया है. इन सबके बीच जिले के करीब 16 हजार किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत बीमा क्लेम का डाटा ही बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड नही हो सका है. इसमें करीब सात हजार किसान अकेले मंत्री सुखदेव पांसे के इलाके मुलताई के हैं. किसानों का आरोप है कि बीमा के लिए प्रविष्टियों का यह पोर्टल 15 दिन पहले ही बंद कर दिया गया. इसे बंद 15 अगस्त को होना था लेकिन, यह 31 जुलाई को ही बंद कर दिया गया. जिससे हजारों किसान अपनी बीमा इंट्री कराने से चूक गए.

बताया जा रहा है कि इस समस्या के सामने आने के बाद मंत्री सुखदेव पांसे, कलेक्टर तेजस्वी एस नायक, सीसीबी प्रशासक अरुण गोठी ने इसे लेकर शासन स्तर पर पत्र व्यवहार किया है. लेकिन, अब तक इस पर कुछ नही हो सका है. बताया जा रहा है कि इस बार कंपनी ने अपना पोर्टल 31 जुलाई को ही बंद कर दिया. इस भ्रम में की पोर्टल अभी खुला रहेगा. हजारों किसान इसके पहले ही बन्द कर दिए जाने से बीमा क्लेम से वंचित हो सकते हैं. इसकी पुष्टि जिले के सबसे बड़े सहकारी बैंक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के प्रशासक भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि हजारों किसान पोर्टल पर इंट्री से चूक गए हैं. इसे चालू कराने अगर सड़क पर उतरना भी पड़े तो वे उतरेंगे.

वहीं, बीजेपी नेताओं को इस खामी की वजह से बैठे बिठाए सरकार और कांग्रेस को घेरने का मौका मिल गया है. वे इसे किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी और छल बताते हुए मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक ले जाने की चेतावनी दे रहे हैं. इसके कारण कांग्रेसी नेताओं के भी माथे पर बल पड़ रहे हैं. दरअसल, कर्जमाफी का दावा और वादा कमलनाथ सरकार और जमीनी नेताओं को परेशान किए हुए है. इस पर बीमा का यह मामला सरकार के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है. फसलों का बीमा मिलने का इंतजार कर रहे किसानों को जब कुछ भी हाथ नही आएगा तो, यह बड़ी नाराजगी का कारण बन सकता है.

प्रदेश में 20 फीसदी वंचित
जानकारी मिली है कि राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध संचालक ने पिछले 4 नवम्बर को सभी जिला कोऑपरेटिव बैंक के सीईओ को पत्र भेजकर डाटा अपलोड में विसंगति होने का उल्लेख किया था. उल्लेख किया गया था कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत खरीफ 2019 में किसानों के डाटा अपलोड करने में अधिकाशतः समस्याएं आधार कार्ड, फसल, गांवों का नाम पोर्टल में दर्शित नहीं होने संबंधित शिकायतें प्राप्त हो रही हैं. वहीं, कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार, सहकारी बैंकों के स्तर पर अभी भी पोर्टल पर 20 फीसदी प्रविष्टियां बची हुई हैं. अत: व्यक्तिगत रूचि लेकर पोर्टल पर प्रविष्टि कराएं. प्रविष्टि न होने पर सीईओ उत्तरदायी होंगे.