मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूल बदहाल, 67,902 स्कूलों में आज भी नहीं है बिजली

मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के बच्चों को बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और मंत्री विदेश यात्राओं में सरकारी खजाने के करोड़ों रुपए फूंक रहे हैं.

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूल बदहाल, 67,902 स्कूलों में आज भी नहीं है बिजली

भोपालः मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के बच्चों को बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और मंत्री विदेश यात्राओं में सरकारी खजाने के करोड़ों रुपए फूंक रहे हैं. आपको जान कर हैरानी होगी कि मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के 67902 स्कूल बिजली विहीन हैं, जहां बिजली का कनेक्शन तक नहीं है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में मध्यप्रदेश के 93231 स्कूलों में बिजली नहीं थी. चुनावों के दौरान जब ये आंकड़ा सामने आया तो बेहतर चुनाव कराने के लिए 25329 स्कूलों में बिजली कि अस्थाई व्यवस्था की गई, जिन्हें सरकार ने स्थाई तौर पर बिजली वाले स्कूलों की श्रेणी में जोड़ दिया. वहीं 14 नवम्बर को बाल दिवस पर सरकार ने 17054 स्कूलों में बिजली पहुंचने के लिए 4 करोड़ 22 लाख 83 हजार 680रुपए आवंटित किए, जो की ऊंट के मुंह में जीरे के जैसा है.

भोपाल के 855 स्कूल बिजली विहीन
मध्यप्रदेश की राजधानी होने के बावजूद भोपाल जिले 855 स्कूलों में बिजली नहीं है, मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) के गृह जिले छिंदवाड़ा (Chhindwara) के 2620 स्कूलों में बिजली का कनेक्शन नहीं है. खुद शिक्षा मंत्री प्रभूराम चौधरी के गृह जिले रायसेन (Raisen) में 2173 स्कूल बिजली विहीन है. सबसे बुरे हालत धार में 3558, रीवा में 3747, सतना में 2779 और खरगौन में 2918 स्कूल बिना बिजली के हैं कमोबेश यही हाल सभी 52 जिलों का है.

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67902 स्कूल बिजली और मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग अधिकारी 2 करोड़ से अधिक रुपए विदेश यात्राओं में खर्च कर चुके हैं. आधा करोड़ फिर फूंकने कि तैयारी में हैं. मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी. दरसअल, मध्यप्रदेश की सरकार दक्षिण कोरिया की शिक्षा प्रणाली को मध्यप्रदेश में लागू करने के लिए जुटी है, इसी सिलसिले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी जून 2019 से अब तक 4 बार अलग अलग 130 अधिकारी कोरिया का दौरा का चुके हैं . चोथी यात्रा में खुद स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभूराम चौधरी भी 35 लोगों के दल के साथ दक्षिण कोरिया का एजुकेशन सिस्टम समझने गए थे. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक अब तक 4 दौरे हो चुके हैं हर विदेशी दौरे में तकरीबन 50लाख रुपए का खर्च आता है मंत्री जी के दौर में थोड़ा ज्यादा हुआ था.

67,902 government schools in Madhya Pradesh have no electricity till now

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6 महीने में अधिकारियों का 5वां दौरा, करोड़ों रुपया स्वाहा
पांचवी बार मध्यप्रदेश के 35 अफसरों और शिक्षकों का एक दल 24 नवम्बर से 28 नवम्बर तक दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रहेगा, जो वहां "स्टीम एजुकेशन" - साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स औऱ मैथ्स "बेस्ड शिक्षा प्रणाली को से को सीखेगा. इसका मूल उद्देश्य किताबी ज्ञान को कौशल विकास के साथ जोड़ने से है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ऐसी कौन सी विधि है जिसे समझने के 130लोग अब तक कम पड़ गए है कि 35 और भेजे जा रहे हैं क्या जो अधिकारी विदेश यात्रा से होकर आए वो ठीक से समझ के नहीं या जो समझे वो दूसरो को समझा नहीं पा रहे है आखिर क्यों बार अधिकारी करोड़ों रुपए फूक कर विदेश यात्रा.