एक विवाह ऐसा भीः दुल्हन को लेने बैलगाड़ी में बारात लेकर पहुंचा दूल्हा

शादी एक ऐसा समारोह है जिसमें फिजूलखर्ची और आधुनिक चमक-दमक बड़ी आम सी बात लगती है. हर कोई शादी में पैसा पानी की तरह बहाता है और पर्यावरण को जमकर गंदा करता है.

एक विवाह ऐसा भीः दुल्हन को लेने बैलगाड़ी में बारात लेकर पहुंचा दूल्हा
शादी पर ट्री ट्रांसप्लांट के लिए दिए 15 हजार

नई दिल्लीः शादी एक ऐसा समारोह है जिसमें फिजूलखर्ची और आधुनिक चमक-दमक बड़ी आम सी बात लगती है. हर कोई शादी में पैसा पानी की तरह बहाता है और पर्यावरण को जमकर गंदा करता है. पटाखे से लेकर खाने की बर्बादी, डिस्पोजल का प्रयोग किसी बात पर कोई अंकुश नहीं होता. ऐसे में धार और रतलाम से शादी की ऐसी मिसालें सामने आई हैं कि हर कोई इनकी इस पहल के लिए तारीफ जरूर करेगा, दरअसल तेजी से घटते वन क्षेत्र और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए यहां के लोग लगातार चमक-दमक को छोड़ साधारण तरीके से शादी कर रहे हैं. साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं.

पेड़ लगाने के लिए दिए 15 हजार
दरअसल, रतलाम के एक गांव तीतरी में युवाओं ने पर्यावरण को लेकर एक अनूठी पहल की है. रतलाम के पर्यावरण प्रेमी प्रवीण राठौर ने अपनी जहां अपनी शादी में फिजूलखर्ची रोकने के लिए कम खर्च में शादी संपन्न करवाई तो वहीं पेड़ ट्रांसप्लांट कराने के लिए 15 हजार की राशि शासन को दी है. प्रवीण का कहना है कि शादियों में हो रही फिजूलखर्ची उन्हें पसंद नहीं है जिसके चलते उन्होंने कम से कम खर्च में शादी करने का फैसला लिया है. साथ ही पर्यावरण से उन्हें खासा लगाव है यही कारण है कि उन्होंने शासन को 15 हजार की राशि का चेक दिया है. प्रवीण ने ये चेक ट्री ट्रांसप्लांट के लिए दिया है.

बैलगाड़ी पर लेकर जा रहे बारात
तो वहीं आधुनिक चमक-दमक को छोड़ धार के गांव कोणदा के युवा परम्परागत तरीके से शादी कर रहे हैं. जहां दूल्हे कार से नहीं बल्कि बैलगाड़ी से बारात लेकर पहुंच रहे हैं. परम्परागत तरीके से शादी करने के पीछे इनका मकसद पर्यावरण की रक्षा और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाना है. इसके साथ ही इन युवाओं ने गोवंश संरक्षण का संदेश भी दिया है. संगीत शिक्षक मयूर भायल ने बताया कि हिन्दू धर्म में गाय को माता के सामान पूजते हैं और बैल भी हमारे खेतों में कृषि में उपयोगी हैं. इसीलिए निजी वाहन को छोड़ हमने बैलगाड़ी पर बारात ले जाने का निश्चय किया है.