जिगर के टुकड़े को मां ने छोड़ा, अस्पताल बना परिवार

 ज़िला अस्पताल के SCNU में भर्ती  ये एक दिन का नवजात अगर बोल पाता तो अपनी जन्म देने वाली मां से बार-बार शायद यहीं सवाल पूछता कि, मां, मैं मिट्टी का खिलौना नहीं, मुझे सड़क किनारे लावारिस क्यों छोड़ा, मैं तो तुम्हारे जिगर का टुकड़ा था ना, मां, तो फिर मुझे जंगल में जानवरों के भरोसे क्यों छोड़ दिया?

जिगर के टुकड़े को मां ने छोड़ा, अस्पताल बना परिवार

खरगोन: ज़िला अस्पताल के SCNU में भर्ती एक दिन का नवजात अगर बोल पाता तो अपनी जन्म देने वाली मां से बार-बार शायद यहीं सवाल पूछता कि, मां, मैं मिट्टी का खिलौना नहीं, मुझे सड़क किनारे लावारिस क्यों छोड़ा, मैं तो तुम्हारे जिगर का टुकड़ा था ना, मां, तो फिर मुझे जंगल में जानवरों के भरोसे क्यों छोड़ दिया?

लेकिन अफसोस, ये जवाब देनी वाली मां ने ही अपने कलेजे के टुकड़े को कुछ इस तरह से इसे ख़ुद से अलग किया जैसे ये लाल कोई सीने से चीपका कपड़ा हो, इसलिए किसी निर्जीव वस्तु की तरह ही ये सड़क किनारे मिला।

लेकिन मासूम की किस्मत में शायद एक खू़बसूरत जिंदगी लिखी है और अब एक नया नाम भी मिल गया है- 'राज' जिसे ज़िला अस्पताल की नर्सिंग स्टॉफ ने दिया है।

इतना ही नहीं SCNU में  काम करने वाली नर्सेज़ और डॉक्टर्स ही अब एक दिन के नवजात राज को परिवार की तरह लाड़-प्यार और दुलार दे रहे हैं।

जब तक बच्चे के परिवार के बारे में कुछ पता नहीं चल जाता, या कोई और व्यवस्था ना हो तब तक ये नर्स और डॉक्टर्स दिन-रात राज की देखभाल और ख़ातिरदारी में जुटे हुए हैं। 

दरअसल, खरगोन के सनावद थाने के बेड़िया के पास मरदलिया-डेहरी रोड पर एक खेत में नवजात को किसी बेदिल मां ने लावारिस छोड़ दिया था, जंगल में नवजात की रोने की आवाज़ सुनकर खेत में काम कर रही बाली बाई को खून से लथपथ  नवजात लावारिस पड़ा हुआ दिखाई दिया।

उसने खेत में काम कर रहे लोगों की मदद से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी।

जननी एक्सप्रेस की मदद से नवजात को बेडिया स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से नवजात की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने खरगोन ज़िला अस्पताल रेफर कर दिया।