जाति प्रकरण की जांच पर अमित जोगी ने उठाए सवाल, पूछा- कलेक्टर के आदेश पर कैसे गठित हुई कमेटी?

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रमुख अमित जोगी की जाति क्या है? इसकी जांच के लिए समिति के गठन और उसकी वैद्यता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. खुद अमित जोगी ने सवाल खड़े किए हैं.

जाति प्रकरण की जांच पर अमित जोगी ने उठाए सवाल,  पूछा- कलेक्टर के आदेश पर कैसे गठित हुई कमेटी?
अमित जोगी ( फाइल फोटो)

रायपुर: छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रमुख अमित जोगी की जाति क्या है? इसकी जांच के लिए समिति के गठन और उसकी वैद्यता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. खुद अमित जोगी ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्यपाल के हस्ताक्षर से 6 सदस्यीय कमेटी गठित होनी थी, लेकिन जिला कलेक्टर ने 5 पांच सदस्य जाति छानबीन समिति का गठन किया है,  मामले मे उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के नियम 14 के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

आपको बता दें कि पूर्व विधायक अमित जोगी जाति प्रकरण में फैसला करने के लिए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला कलेक्टर ने एक छानबीन कमेटी का गठन किया है. इस पर सवाल उठाते हुए अमित जोगी ने कहा कि समिति के गठन के लिए अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ, आखिर कैसे कलेक्टर के निर्देश पर समिति बना सकते हैं. अमित जोगी ने कलेक्टर पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया है.

यह छानबीन समिति अब तक मामले में दो बार बैठ चुकी है, लेकिन दोनों ही बार अमित जोगी समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए हैं. शुक्रवार को मामले में तीसरी पेशी थी पर अमित जोगी ​ने फिर से समिति के सामने उपस्थिति नहीं हुए. जाति प्रकरण अमित जोगी के राजनीतिक करियर पर भी प्रभाव डाल सकता है. दरअसल, मरवाही से विधायक रहे अजीत जोगी के निधन के बाद सीट खाली हो गई है. छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने उपचुनाव में प्रत्याशी के रूप में अमित जोगी का नाम आगे कर दिया है.

एसटी आरक्षित मरवाही सीट से अमित योगी हैं उम्मीदवार
लेकिन मरवाही सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है. ऐसे में छानबीन समिति और उनका कोई भी निर्णय अमित जोगी के राजनीतिक भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है. अगर उन्हें आदिवासी नहीं माना जाता तो ऐसे में मरवाही सीट से उनका लड़ पाना मुश्किल हो जाएगा. अजीत जोगी और उनका परिवार शुरुआत से ही दावा करता आया है कि वे आदिवासी हैं. कंवर जनजाति के हैं. कंवर जनजाति छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में पाई जाती है. छत्तीसगढ़ में इस जनजाति के लोग मुख्यरूप से रायगढ़, बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, जशपुर और सरगुजा जिलों में रहते है.

क्या है अजीत जोगी और उनके परिवार से जुड़ा जाति प्रकरण?
वर्ष 2001 में संत कुमार नेताम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में अजीत जोगी के आदिवासी होने के दावे को चुनौती दी थी. आयोग ने जोगी को नोटिस भेजा तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि किसी व्यक्ति की जाति की जांच करने का अधिकार अनुसूचित जनजाति आयोग के पास नहीं है. इसी बीच अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र की सीबीआई जांच कराने की मांग भी उठी.

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इसके लिए छानबीन समिति का गठन किया गया. समिति ने 2013 में अपनी रिपोर्ट में अजीत जोगी को आदिवासी मानने से इनकार कर दिया था. इसके खिलाफ अजीत जोगी ने हाई कोर्ट में फिर से याचिका दाखिल की थी. याचिका की सुनवाई के दौरान तत्कालीन महाधिवक्ता ने छानबीन समिति की रिपोर्ट को यह कहते हुए वापस ले लिया था कि कमेटी ने ठीक से तथ्यों की जांच नहीं की है. इसके खिलाफ 2014 में संत कुमार नेताम ने याचिका लगाई थी. अब तक इस मामले की जांच जारी है.

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