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मध्य प्रदेशः आंगनबाड़ियों पर सरकार की नजर, ग्रेडिंग के जरिए किया जाएगा काम का आंकलन

मध्य प्रदेश में आंगनबाड़ियों (Anganwadi) की व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार अब सख्त नजर आ रही है. इसके लिए सरकार ने आंगनबाड़ियों में ग्रेडिंग सिस्टम शुरू किया है. हर महीने आंगनबाड़ी स्टाफ को एक रिपोर्ट देना होगी. 

मध्य प्रदेशः आंगनबाड़ियों पर सरकार की नजर, ग्रेडिंग के जरिए किया जाएगा काम का आंकलन
(फाइल फोटो)

भोपालः मध्य प्रदेश में आंगनबाड़ियों (Anganwadi) की व्यवस्था सुधारने के लिए कमलनाथ सरकार अब सख्त नजर आ रही है. इसके लिए सरकार ने आंगनबाड़ियों में ग्रेडिंग सिस्टम शुरू किया है. हर महीने आंगनबाड़ी स्टाफ को एक रिपोर्ट देना होगी. इसी के आधार पर हर आंगनबाड़ी को ग्रेड मिलेगी और खराब प्रदर्शन करने वाली आंगनबाड़ियों के कर्मचारी और अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर आंगनबाड़ियों को 4 तरह के ग्रेड मिलेंगे.

90 से ज्यादा अंक लाने वाले आंगनबाड़ी A+ ग्रेड में होगी और 60 से कम अंक लाने वाले आंगनबाड़ी को D ग्रेड दिया जाएगा. इस सिस्टम में D ग्रेड सबसे निचला ग्रेड होगा. सरकार का मानना है कि ग्रेडिंग सिस्टम से आंगनबाड़ियो के बीच प्रतिस्पर्था बढ़ेगी और जिससे बेहतर परिणाम मिलेंगे. बता दें कि आंगनबाड़ियों को जो मासिक रिपोर्ट देना होगी वो 13 बिंदुओं पर आधारित होगी.

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बता दें मध्य प्रदेश में कुपोषण खत्म करने के लिए राज्य की कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Govrnment) लगातार नए कदम उठा रही है और कुपोषण के खात्मे में जुटी है. इसी के मद्देनजर अब सरकार ने ग्रेडिंग सिस्टम के जरिए आंगनबाड़ियों के काम की समीक्षा करने की कवायद शुरू की है. बता दें देश में करीब एक लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इन केंद्रों में अस्सी लाख से ज्यादा बच्चों को पोपण आहार दिया जाता है. पोषक तत्वों के लिए राज्य सरकार 5 हजार करोड़ रुपये का बजट विभाग को जारी करता है. जिसमें से 1517 करोड़ रूपये आहार पर खर्च किया जाता है.