Assembly results 2018: इन 7 मुद्दों ने लिख दी MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की किस्मत
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Assembly results 2018: इन 7 मुद्दों ने लिख दी MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की किस्मत

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ लिखते दिख रहे हैं. पांच में से दो राज्यों में कांग्रेस आगे चल रही है और दो राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने बढ़त बनाई हुई है.

Assembly results 2018: इन 7 मुद्दों ने लिख दी MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की किस्मत

नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ लिखते दिख रहे हैं. पांच में से दो राज्यों में कांग्रेस आगे चल रही है और दो राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने बढ़त बनाई हुई है. मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला है. ऐसे में अगर उन मुद्दों को छांटा जाए जिन्होंने हिंदी पट्टी के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव को इस रूप में ढाला तो वे मुद्दे कुछ इस तरह होंगे:

1.  दलित उत्पीड़न निरोधक कानून
इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर दलित उत्पीड़न कानून में तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधान को शिथिल कर दिया था. इसके विरोध में दलित संगठनों ने देशव्यापी प्रदर्शन किए. नतीजतन केंद्र सरकार ने पुराने प्रावधान को बहाल कर दिया. इससे सामान्य वर्ग के लोगों में गुस्सा पनपा और मध्य प्रदेश में तो सवर्णों की पार्टी ही वजूद में आ गई. इस आंदोलन का असर यह हुआ कि भाजपा से सवर्ण वोट बैंक खाकसर ब्राह्मण वोट बैंक खिसका.

2.  किसानों की समस्याएं
कांग्रेस पार्टी ने पिछले दो-तीन साल में देश भर में हुए किसानों के आंदोलनों को बड़ा मुद्दा बनाया. पार्टी ने पूरा चुनाव अभियान किसानों के मुद्दे पर फोकस किया. जवाब में बीजेपी ने भी किसानों की बातें उठाईं.

3.  कर्ज माफी
कांग्रेस ने हिंदी पट्टी के तीनों राज्यों में किसानों की कर्ज माफी का वादा किया. पार्टी ने सरकार बनने के 10 दिन के भीतर कर्ज माफ करने की बात कही. इस वादे का लाभ कांग्रेस को चुनाव में मिलता नजर आ रहा है. वहीं, बीजेपी इस तरह का कोई वादा नहीं कर सकी.

4.  हिंदुत्व
विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने खुद को हिंदुत्व समर्थक पार्टी के तौर पर पेश किया. बीजेपी ने राजस्थान में हिंदुत्व के मुद्दे को ज्यादा हवा दी लेकिन उसका फायदा उसे नहीं मिला. 

5.  मंदिर दर्शन
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सभी प्रदेशों में प्रमुख मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की. इस दौरान प्रदेश के स्थानीय नेता उनके साथ रहे. कांग्रेस प्रचार कमेटी के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कई मंदिरों के दर्शन किए. बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया लेकिन यही बात उसके खिलाफ गई. 

6.  रोजगार
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने रोजगार के बेहतर अवसर मुहैया कराने के वादे किए. कांग्रेस ने बेरोजगारी के मुद्दे को जोर-शोर से उछाला. अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाने में कामयाब रही. 

7. हुनमान जी और कुंभकर्ण
इन चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान हनुमान को दलित बताया तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुंभाराम योजना को कुंभकर्ण योजना बोल दिया. 

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