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कारसेवा के दौरान खाई थी गोली, आज भीख मांगकर जिंदगी गुजार रहा है ये शख्स

6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित भूमि पर बने बाबरी ढांचे को ढहा दिया था. 

कारसेवा के दौरान खाई थी गोली, आज भीख मांगकर जिंदगी गुजार रहा है ये शख्स
गेसराम छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की करतला तहसील के ग्राम चचिया के मूलनिवासी है.

नीलम पदवार/कोरबा: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में शनिवार को दिए अपने फैसले में हिंदू पक्ष को विवादित भूमि देने निर्णय सुनाया. इसके साथ ही अदालत ने अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि प्रदान किए जाने के भी निर्देश दिए. बता दें कि 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित भूमि पर बने बाबरी ढांचे को ढहा दिया था. राममंदिर निर्माण के लिए कारसेवा में देश के कोने-कोने से रामभक्त शामिल हुए थे.

कारसेवा करने आए कई लोगों को बड़ी राजनीतिक सफलता मिली. वहीं, कुछ ऐसे भी थे, जो गुमनामी में खो गए. ऐसे ही एक कारसेवक का नाम है गेसराम चौहान. गेसराम छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की करतला तहसील के ग्राम चचिया के मूलनिवासी है. वे छत्तीसगढ़ के ऐसे एक मात्र व्यक्ति हैं, जिन्हें 1990 की कारसेवा के दौरान पेट में गोली लगी थी. उसके बाद 1992 की कारसेवा में भी शामिल हुए और लाठियां खाईं. 

गेसराम चौहान ने बताया कि वह किसानी करते थे. वहीं, पिता की मौत के बाद तीनों भाइयों ने जमीन हड़प ली है. गेसराम अब सिमकेंदा करतला के आसपास के गांव में भिक्षा मांग कर गुजर बसर कर रहे हैं. वहीं, जब उन्हें बताया गया कि जिस राममंदिर के लिए आपने गोली खाई थी, वह अब बनने वाला है. तब 65 साल के हो चुके गेसराम अवाक हो गए. हाथ में पकड़ी लाठी, भिक्षापात्र व झोला गिर पड़ा. भावावेश में वे रोने लगे. बार-बार पूछते रहे कि अब तो रामलला का मंदिर सचमुच बनेगा न.

दरअसल, 1990 में कोरबा से कारसेवकों का जत्था जुड़ावन सिंह ठाकुर, किशोर बुटोलिया की प्रमुख अगुवाई में गया था. 30 अक्टूबर को सभी फैजाबाद पहुंच चुके थे. उसी दिन कारसेवकों पर पहली गोलीबारी हुई थी. इसके बाद 2 नवंबर को जब कारसेवकों का बड़ा जत्था आगे बढ़ा, तो फिर से पुलिस व सुरक्षाबलों ने फायरिंग कर दी थी. फायरिंग के दौरान गेसराम को पेट में गोली लग गई थी. फैजाबाद हास्पिटल में 15 दिन तक वे भर्ती थे.