नक्सलियों के सफाए के लिए सरकार ने बनाया खास प्लान, 2800 जवानों को दी जाएगी स्पेशल ट्रेनिंग!
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नक्सलियों के सफाए के लिए सरकार ने बनाया खास प्लान, 2800 जवानों को दी जाएगी स्पेशल ट्रेनिंग!

बस्तर संभाग में 7 जिले हैं और हर जिले में से 400 युवाओं को बस्तर फाइटर्स के दल में शामिल किया जाएगा.

नक्सलियों के सफाए के लिए सरकार ने बनाया खास प्लान, 2800 जवानों को दी जाएगी स्पेशल ट्रेनिंग!

बस्तर/अविनाश द्विवेदीः बस्तर में नक्सलियों के सफाए के लिए सरकार ने एक नई पहल की है. इसके तहत सरकार नक्सलियों से टक्कर लेने के लिए विशेष लड़ाकों का दल तैयार करेगी. जिसे 'बस्तर फाइटर्स' नाम दिया जाएगा. इन बस्तर फाइटर्स की खास बात होगी कि ये लड़ाके स्थानीय होंगे.

2800 जवानों को दी जाएगी खास ट्रेनिंग
बस्तर संभाग से नक्सली आंदोलन को खत्म करने के लिए 2800 जवानों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी. बस्तर संभाग में 7 जिले हैं और हर जिले में से 400 युवाओं को बस्तर फाइटर्स के दल में शामिल किया जाएगा. इन स्थानीय युवाओं को नियुक्ति के बाद विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और इसके लिए विशेष बजट का प्रावधान भी किया गया है. सरकार की योजना है कि इन स्थानीय युवाओं को खास प्रशिक्षण देने के बाद नक्सलियों के हार्डकोर इलाकों में भेजा जाएगा. 

डीआरजी ग्रुप की तर्ज पर होगा गठन
बता दें कि बस्तर में नक्सल मोर्चे पर पहले से ही डीआरजी ग्रुप काम कर रहा है. डीआरजी ग्रुप में भी स्थानीय युवकों को शामिल किया गया है. स्थानीय युवकों को फोर्स में शामिल करने का फायदा ये है कि वह जंगल में लड़ाई लड़ने में ज्यादा बेहतर होते हैं और नक्सलियों के खिलाफ विभिन्न ऑपरेशन में कारगर साबित हुए हैं. डीआरजी ग्रुप ने भी कई उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की हैं. 

बस्तर फाइटर्स और डीआरजी जैसे ग्रुप बनाने के पीछे सबसे अहम वजह ये है कि स्थानीय लड़ाके छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और यहां की विपरीत परिस्थितियों से पूरी तरह वाकिफ होते हैं. जिसका फायदा नक्सली ऑपरेशन में मिलता है. साथ ही स्थानीय युवा यहां की संस्कृति, रहन-सहन और भाषा से भी परिचित होते हैं, जिसके चलते आदिवासी लोगों के साथ यह बेहतर संवाद कर पाते हैं. 

डीआरजी का गठन साल 2008 में सबसे पहले बस्तर के कांकेर और नारायणपुर जिलों में किया गया था. इसके बाद 2013 में बीजापुर और बस्तर जिले में भी डीआरजी का गठन किया गया. अब सुकमा, कोंडागांव और दंतेवाड़ा में भी डीआरजी का गठन किया जा चुका है. डीआरजी में कई जवान ऐसे हैं, जो पहले नक्सली थे और सरेंडर के बाद उन्हें डीआरजी में शामिल किया गया. जिसके चलते वह नक्सलियों, उनकी आदतों और ऑपरेशनल पैटर्न के बारे में काफी जानते हैं. 

अब डीआरजी की तर्ज पर ही सरकार ने बस्तर फाइटर्स का गठन किया है. माना जा रहा है कि डीआरजी के बाद बस्तर फाइटर्स की मदद से बस्तर संभाग में नक्सली मूवमेंट को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

नक्सली इलाके के लोगों को समाज की मुख्यधारा से भी जोड़ेगी सरकार
हार्डकोर नक्सलियों के खिलाफ ताकत से नकेल कसने के साथ ही सरकार नक्सली इलाकों में विभिन्न विकास योजनाएं चलाकर भी वहां के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है. सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों के युवाओं को रोजगार प्रदान कर और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देकर उन्हें नक्सलवाद की चपेट में आने से रोकने का प्रयास कर रही है. बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने यह जानकारी दी है. 

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