अफसरों के गले की फांस बन गया गुमटियां हटाना, गुमटी वालों ने की FIR की मांग

मंगलवार को इस अतिक्रमण हटाओ मुहिम के खिलाफ गुमटी और ठेले वाले एकजुट हो गए. इन लोगों ने उन्हें बलपूर्वक हटाने के खिलाफ पुलिस को आवेदन सौंपकर अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है.

अफसरों के गले की फांस बन गया गुमटियां हटाना, गुमटी वालों ने की FIR की मांग
गुमटीधारियों ने बैतूल कोतवाली पहुंच हटाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

इरशाद हिंदुस्तानी/बैतूल: बैतूल में गुमटी और ठेले वालों को अतिक्रमण के नाम पर हटाने की कार्रवाई प्रशासन के लिए गले की फांस बन गई है. इसके विरोध में सैकड़ों गुमटीधारियों ने बैतूल कोतवाली पहुंच हटाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. पूरे प्रदेश में चल रहे अतिक्रमण और माफिया अभियान में यह पहला मामला होगा जिसमें गुमठियों के हटाने पर लोगों ने अफसरों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की मांग की है. लोगों के इस कदम से अधिकारी सकते में हैं और इस मामले में कोई भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं. 

बता दें कि बैतूल नगरपालिका प्रशासन और तहसील अमले ने एक पखवाड़े से बैतूल में गुमटी और ठेले वालों को हटाने का अभियान चलाया हुआ है. मंगलवार को इस अतिक्रमण हटाओ मुहिम के खिलाफ गुमटी और ठेले वाले एकजुट हो गए. इन लोगों ने उन्हें बलपूर्वक हटाने के खिलाफ पुलिस को आवेदन सौंपकर अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है. खुद को पथ विक्रेता मानने वाले सैकड़ों लोगों का आरोप है कि, उन्हें बिना किसी सुनवाई के हटाया गया है. 

बिना किसी सरकारी आदेश के हो रही कार्यवाही
आवेदन में कहा गया है कि, नगर पालिका परिषद बैतूल ने पथ विक्रेता का प्रमाण दिया था जो उनके पास हैं. कार्रवाई के दौरान उन्हें सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया और बलपूर्वक हटा दिया गया. यहां तक कि उनसे गाली-गलौज की गई. पथ प्रमाण पत्र दिखाए जाने के बावजूद भी अपशब्दों का उपयोग किया गया और शासकीय कार्य में बाधा डाले जाने का अपराध पंजीबद्ध करवाए जाने की धमकी दी गई. अफसरों के पास किसी भी न्यायालय का कोई आदेश नगरपालिका बैतूल एवं तहसीलदार बैतूल को नहीं था और न ही प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पथ विक्रेताओं एवं पथ के किनारे बैठकर अपनी आजीविका चलाने वालों को हटाने का कोई निर्देश निर्देश दिया है.