भोपाल: तलाक के मामले में फैमिली कोर्ट का पति को आदेश, 'पहले पत्नी को करवा चौथ की शॉपिंग कराओ, फ‍िर करेंगे सुनवाई'

भोपाल की फैमिली कोर्ट में तलाक के एक मामले में सुनवाई चल रही थी. मामले में पति को पत्नी के कहीं और अफेयर होने का शक है और दोनों 2 साल से अलग रह रहे हैं.

भोपाल: तलाक के मामले में फैमिली कोर्ट का पति को आदेश, 'पहले पत्नी को करवा चौथ की शॉपिंग कराओ, फ‍िर करेंगे सुनवाई'
(सांकेतिक तस्वीर)

भोपालः महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत करती हैं, लेकिन क्या हो जब यही त्योहार दोनों के रिश्ते की उम्र भी लंबी करने में मदद करे. राजधानी भोपाल में एक फैमिली कोर्ट ने टूटे हुए परिवार को जोड़ने के लिए अब करवा चौथ के रूप में आखिरी कोशिश की है. दरअसल, भोपाल की फैमिली कोर्ट में तलाक के एक मामले में सुनवाई चल रही थी. मामले में पति को पत्नी के कहीं और अफेयर होने का शक है और दोनों 2 साल से अलग रह रहे हैं. सुनवाई के दौरान जज ने पति और पत्नी से करवा चौथ को लेकर बात की तो दोनों ने पिछले साल की करवा चौथ के घटना का जिक्र किया.

पत्नी ने बताया कि पिछले साल उसने पति के लिए व्रत रखा था, लेकिन वह व्रत खुलवाने नहीं आया, जिसके बाद उसे खुद ही व्रत खोलना पड़ा. इस पर उसे और उसके परिवार को काफी बुरा लगा. वहीं जब जज ने पति से इसे लेकर सवाल किया तो पति ने कहा कि उसने करवाचौथ के दिन अपनी पत्नी को फोन किया था, लेकिन कॉल उसकी उसकी छोटी बहन ने रिसीव किया था और उसने उन दोनों की बात नहीं करवाई. इसके बाद जज ने सुनवाई रोकते हुए पति को निर्देश दिया कि वो पत्नी को करवाचौथ की शॉपिंग करवाए और दोनों अच्छे से करवाचौथ मनाए इसके बाद मामले पर सुनवाई होगी.

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जज ने काउंसलर नुरुनिसा खान को निर्देशित किया है कि वो अगली सुनवाई में इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें. मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी ने बताया कि पांच साल पहले उसकी उसके पति से अरेंज मैरिज हुई थी. पति के साथ तीन साल बहुत ही अच्छे बीते, पति हर काम में उसकी मदद करते थे. हर बात में साथ देते थे. लेकिन, अचानक ही पति का व्यवहार बदल गया. वे कटे-कटे से रहने लगे और बात-बात पर झगड़ा करने लगे. 

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पत्नी ने आगे बताया कि कई बार बीच में ही ऑफिस पहुंच जाते. किस से मिल रही हो किससे नहीं, उन्हें हर शाम को इसका हिसाब देना पड़ता था. हद तो तब हो गई जब इन्होंने टूर के दौरान एक पुरुष साथी के साथ नाम जोड़कर जलील किया. उस दिन उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची. जबकि उस पुरुष साथी से उनका कोई लेना देना नहीं था. महिला का भी कहना था कि वह ऐसे पुरुष के साथ नहीं रह सकती थी जो शक की नजर से उसे देखता हो.