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मध्य प्रदेश में सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है और केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य के लिए 4,415 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 2 प्रमुख सड़क निर्माण परियोजनाओं को हरी झंडी दी है. इन बड़े प्रोजेक्ट्स से मध्य प्रदेश के चार जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. इस ऐतिहासिक सौगात पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह प्रदेश में 'डबल इंजन' सरकार के तेज विकास का सीधा परिणाम है. इन शानदार फोर-लेन और टू-लेन सड़कों के बनने से न सिर्फ राज्य की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के बंपर अवसर भी पैदा होंगे. मध्य प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, इसलिए यहां विकास की रफ्तार पर भी दोगुनी है.
इन 4 जिलों की बदलेगी सूरत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण सौगात से प्रदेश के जनजातीय बहुल जिले बैतूल, खंडवा, खरगौन और बड़वानी के समग्र विकास को तेज गति मिलेगी. साथ ही, हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. उल्लेखनीय है कि 3 जून को नई दिल्ली में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एनएच-347बी के हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड पर मौजूदा इंटरमीडिएट लेन को पक्के शोल्डर स्टैंडर्ड के साथ 2-लेन की सड़क (125.01 किमी) में अपग्रेड करने तथा एनएच-347बी के देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) को हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत 2-लेन से 4-लेन सड़क में विस्तारित करने की मंजूरी दे दी गई है.
डबल इंजन की सरकार है, तो विकास की रफ्तार भी दोगुनी है…
आज केंद्रीय मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति द्वारा मध्यप्रदेश में ₹4,415.60 करोड़ की सड़क निर्माण परियोजना को स्वीकृति मिली है। इसके माध्यम से जनजातीय बाहुल्य जिले बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी के विकास की गति… pic.twitter.com/6ZMm2P2BnU
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 3, 2026
बेहतर होगी रोड कनेक्टिविटी
बताया गया है कि कुल 233.653 किमी लंबी इस परियोजना पर करीब 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस परियोजना के तहत खरगौन जिले में 16.20 किमी लंबा एक ग्रीनफील्ड बाईपास भी विकसित किया जाएगा। यह उन्नत कॉरिडोर मध्यप्रदेश में बेहतर रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा और 6 पीएम गतिशक्ति आर्थिक नोड्स को जोड़ते हुए मल्टीमॉडल एकीकरण को भी बढ़ावा देगा.