'जुगाड़' के भरोसे चल रहा है ये सरकारी अस्पताल, यहां अंधेरे में होती है डिलेवरी

बताया जा रहा है कि ये मामला आज का नहीं बल्कि कई सालों से ऐसा चला आ रहा है.

'जुगाड़' के भरोसे चल रहा है ये सरकारी अस्पताल, यहां अंधेरे में होती है डिलेवरी
यह प्राथमिक अस्पताल एक एनम और स्वीपर के भरोसे चल रहा है

छतरपुर: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का खस्ता हाल एक बार फिर नजर आया है. राज्य के छतरपुर जिले में घटी एक अप्रत्याशित घटना ने अस्पताल के साथ-साथ कई व्यवस्थाओं की पोल खोल दी. जानकारी के मुताबिक अस्पताल में बिजली व्यवस्था ठीक न होने पर महिलाओं की डिलेवरी मोमबत्ती और टॉर्च की सहायता से कराई जाती है. बताया जा रहा है कि ये मामला आज का नहीं बल्कि कई सालों से ऐसा चला आ रहा है. ये आलम तब है जब मौजूदा सरकार ने राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की खातिर करोड़ों रूपये खर्च किया है और जमीनी हकीकत पर सब शून्य नजर आ रहा है. आपको इस बात से भी हैरानी होगी कि जिले के एक अस्पताल में पदस्थ स्वीपर (जिसका काम अस्पताल में साफ-सफाई का होता है) गर्भवती महिला का बीपी नापती है और हीमोग्लोबिन की जांच के लिए स्लाइड भी तैयार करती है.

एमपी का राजनीतिक गढ़ कहा जाता है छतरपुर
आपको बता दें कि ये पूरा मामला मध्यप्रदेश छतरपुर जिले का है. इसे मध्यप्रदेश की राजनीति का गढ़ भी कहा जाता है. क्योंकि यही वह जगह है जहां से उमा भारती के राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई थी. इसके अलावा यह ललिता यादव राज्यमंत्री का गृह जिला भी है. ऐसे महत्वपूर्ण जिले में शिवराज सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर तमाम सवालिया निशान लग रहे हैं.

एनम और स्वीपर के भरोसे चल रहा है अस्पताल
छतरपुर जिले से 100 किमी दूर स्थित चंदला विधानसभा अंतर्गत सरवई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से हैरान कर देने वाली बात सामने आई है कि अस्पताल की लाइट अक्सर आती-जाती रहती है और खराब भी रहती है. ऐसे में महिलाओं की डिलेवरी अंधेरे में या फिर मोमबत्ती और टॉर्च की रोशनी में कराई जाती है. यही नहीं इस अस्पताल में किसी डॉक्टर की तैनाती भी नहीं है. जिस वजह से यह प्राथमिक अस्पताल एक एनम और स्वीपर के भरोसे चल रहा है. अस्पताल में पदस्थ एक स्वीपर गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर नापती है और बाद में वही स्लाइड बना कर उनका हिमोग्लोबिन भी चेक करती है.

विधायक ने भी मानी बात- कहा मेरा क्षेत्र सबसे इंटीरियर में
इस बार में बात करने पर चंदला विधानसभा के विधायक आर डी प्रजापति ने कहा, "क्षेत्र में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं और मौतें भी बहुत हो चुकी हैं. हजारों मौत हो गई है. मेरे यहां जितने अस्पताल हैं उसमें डॉक्टर नहीं हैं. मैंने कई बार विधानसभा में भी कई बार यह मुद्दा लगाया है और ध्यानाकर्षण भी किया है. मेरा क्षेत्र छतरपुर से भी सौ किलोमीटर दूर स्थित है और 100 किलोमीटर आते-आते मौतें हो जाती हैं. 1 से 2 डॉक्टर हैं जो रहते भी नहीं. सबसे ज्यादा बच्चों की मौत होती है. एक्सीडेंट में भी मौतें होती हैं. उनको समय पर इलाज ना मिलने के कारण बहुत मौत होती हैं. सबसे ज्यादा इंटीरियर वाला मेरा क्षेत्र है. और तो और सरबई क्षेत्र में डिब्बी की रोशनी में डिलेवरी होती है वहां अधिकतर लाइट नहीं रहती ना जनरेटर की सुविधा है क्योंकि मेरा क्षेत्र सबसे ज्यादा इंटीरियर में है."

जननी एक्सप्रेस के ड्राइवर ने मांग लिए पैसे
जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवई में भर्ती एक महिला (संगीता) से उसकी परेशानी के बारे में पूछा गया तो उसने बताया, "देर रात मेरी डिलेवरी घर में ही हो गई थी और 12 घंटे बीत गए किसी ने भी मेरी और मेरे बच्चे की सुध नहीं ली. न ही बच्चे का अब तक टीकाकरण हुआ जो अब तक हो जाना चाहिए था. जब कहा कि छुट्टी कर दो तो पैसे के मांग करने लगे." वहीं उनके परिजन राम रतन अहिरवार ने बताया कि जननी एक्सप्रेस के लिए ड्राइवर ने पैसे की मांग की और 200 रुपये लिए हैं. जब इस मामले में जननी एक्सप्रेस ड्राइवर आशाराम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मरीज के द्वारा उल्टी कर दी थी जिसका पैसा मेरे द्वारा लिया गया.

अधिकारी ने कहा- होगी कार्यवाही
वहीं इस मामले जब छतरपुर के मुख्यचिकित्साधिकारी वी एस बाजपेई से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मोमबत्ती में डिलेवरी होना गलत है कहीं ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है. और जब स्वीपर द्वारा जांच की जाने वाली बात पूछी गई तो उन्होंने कहा ये ANM का दायित्व है, अगर ऐसा होता है तो कार्यवाही की जाएगी.

अजय सिंह ने साधा सरकार पर निशाना
हालांकि वही इस मामले में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "14 साल में मेडिकल तो नहीं मिला. अरे मेडिकल तो छोड़ो कम से कम मोमबत्ती में ऑपरेशन तो मत होने दो."

(स्टोरी इनपुट- ANI)