जोगी के गढ़ को जीत के लिए बीजेपी ने झोंकी ताकत, नियुक्त किए प्रभारी और सह-प्रभारी

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद खाली हुई मरवाही विधानसभा सीट पर कांग्रेस से लेकर बीजेपी की नजरें टिक गई हैं. इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरा जोर लगा रही है.

जोगी के गढ़ को जीत के लिए बीजेपी ने झोंकी ताकत, नियुक्त किए प्रभारी और सह-प्रभारी
फाइल फोटो

रायपुर : पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद खाली हुई मरवाही विधानसभा सीट पर कांग्रेस से लेकर बीजेपी की नजरें टिक गई हैं. इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरा जोर लगा रही है. बीजेपी ने मरवाही विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को प्रभारी नियुक्त किया है. 

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिला में होने वाले मरवाही विधानसभा उपचुनाव के लिए पार्टी की तरफ से पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को प्रभारी और भूपेन्द्र सवन्नी को सह-प्रभारी नियुक्त किया है. वहीं पिछले दिनों पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा था कि हम पूरी तरह से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं. यहां पर बीजेपी ही जीत हासिल करेगी.

क्या है मरवाही सीट का इतिहास ? 
छत्तीसगढ़ की सबसे अहम विधानसभा सीटों में से एक मरवाही में पिछले कई सालों से जोगी परिवार का राज है.  अजीत जोगी ने इसी सीट से जीत हासिल कर मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया था. जोगी इस सीट से लगातार 2003 और 2008 में जीत दर्ज करा चुके थे. 

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2003 के चुनावों में अजीत जोगी ने 76,269 वोटों के साथ मरवाही विधानसभा सीट को अपने नाम किया था. जबकि उनके विपक्ष में खड़े बीजेपी के नंद कुमार साई को 22,119 वोट ही मिल सके. वहीं 2008 में जोगी ने फिर करीब 42 हजार के बड़े अंतर से जीत हासिल की. उनको जहां 67,522 वोट मिले तो वहीं भाजपा प्रत्याशी ध्यान सिंह को 25,431 वोट ही मिल सके. 

2013 में अजीत जोगी ने मरवाही में अपनी जगह बेटे अमित जोगी को दी. जिस पर खरे उतरते हुए अमित जोगी ने 82,909 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा को 36,659 वोट मिल सके. हालांकि 2018  का चुनाव खुद अजीत जोगी ने लड़ा और 45 हजार 395 वोटों के साथ जीत दर्ज की.  

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