इंदौर लोकसभा सीट: BJP प्रत्याशी बोले- काम न करने वालों पर अमित शाह के जासूसों की नजर है

 शंकर लालवानी के लिए कोई काम नहीं करना चाहता, इस वजह से कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है. 30 साल बाद इंदौर में बीजेपी ने अपना लोकसभा प्रत्याशी बदला है. 30 साल और 8 चुनाव तक सुमित्रा महाजन इंदौर की सांसद रही है.

इंदौर लोकसभा सीट: BJP प्रत्याशी बोले- काम न करने वालों पर अमित शाह के जासूसों की नजर है
इंदौर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवा हैं शंकर लालवानी (फोटो साभारः facebook)

नई दिल्लीः बीजेपी का जो भी कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव में काम नहीं करेगा, उस पर अमित शाह के जासूसों की नजर है. चुनाव के बाद उन पर कार्रवाई की जाएगी. यह कह कर इंदौर में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं से काम करवाया जा रहा है. हालांकि बीजेपी पदाधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं. जबकि कांग्रेसियों का कहना है कि शंकर लालवानी के लिए कोई काम नहीं करना चाहता, इस वजह से कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है. 30 साल बाद इंदौर में बीजेपी ने अपना लोकसभा प्रत्याशी बदला है. 30 साल और 8 चुनाव तक सुमित्रा महाजन इंदौर की सांसद रही है. अब ताई ने अपनी चाबी अपने खास शंकर लालवानी के हाथो में सौंपी है. 

ऐसे में लालवानी का नाम घोषित होने के बाद बीजेपी के कई कार्यकर्ता चुनाव में काम करने से इनकार कर चुके हैं. जिसके चलते कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर काम करने का दबाव बनाने के लिए बीजेपी कार्यालय में हुई एक बैठक में खुद शंकर लालवानी यह कह चुके हैं कि बीजेपी का जो भी पदाधिकारी या कार्यकर्त्ता चुनाव में प्रत्याशी के लिए काम नहीं करेगा, उस पर अमित शाह के जासूसों की नजर है और इसकी खबर उन तक पहुंचाई भी जाएगी. इसके बाद उन पर कार्रवाई भी की जाएगी. हालांकि बीजेपी पदाधिकारी इस तरह की बता से इनकार कर रहे है. 

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3 बार पार्षद, नगर निगम के सभापति इंदौर बीजेपी अध्यक्ष और आईडीए अध्यक्ष रहे लालवानी का खुद का जमीनी कार्यकर्ता नहीं है. ऐसे में कई बड़े नेता और उनके खेमे लालवानी से नाराज हैं. कांग्रेसी तो यहां तक कह रहे हैं कि ताई ने लालवानी के हाथ में चाबी दे दी है, लेकिन वह यह चाबी पंकज संघवी को घर देते जायेंगे. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला के मुताबिक लालवानी के लिए कार्यकर्ता और पदाधिकारी काम करने से इनकार कर चुके हैं. अब उन पर अमित शाह के नाम का दबाव बनाकर उनसे काम करवाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसका कोई फायदा लालवानी को नहीं मिलेगा.

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शंकर लालवानी को प्रत्याशी बनाये जाने के बाद बीजेपी के ही कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट सा गया है. कार्यकर्त्ता चाहते थे कि किसी बड़े नेता को पार्टी मौका दे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. अब तो बीजेपी कार्यकर्ता भी मन ही मन में बीजेपी की जीत को लेकर आशांकित हैं.