क्या मरवाही सीट पर 20 साल बाद जीत दर्ज कर इतिहास रच पाएगी बीजेपी?, बनाया ये प्लान

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद खाली हुई मरवाही सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है, जिसे लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है. सभी दल यहां जीत के लिए जोर लगा रहे हैं.

क्या मरवाही सीट पर 20 साल बाद जीत दर्ज कर इतिहास रच पाएगी बीजेपी?, बनाया ये प्लान
फाइल फोटो

रायपुर: छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद खाली हुई मरवाही सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है, जिसे लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है. सभी दल यहां जीत के लिए जोर लगा रहे हैं. जहां सत्तारुढ़ कांग्रेस इस सीट पर परचम लहराने की जुगत में है, वही बीजेपी भी पीछे हटने वालों में से नहीं है. जीत का इतिहास रचने के लिए पार्टी ने उम्मीदवार उतारने के लिए मंथन शुरू कर दिया है. 

दरअसल शनिवार को बीजेपी चुनाव समिति की बैठक हुई. इस दौरान मरवाही उपचुनाव के प्रत्याशी के लिए 4 नामों का पैनल बनाया गया. ये पैनल केंद्रीय चुनाव समिति के पास भेजा जाएगा. जानकरी के मुताबिक,  एक नाम तय होने के बाद प्रत्याशी के नाम का ऐलान होगा. 

मरवाही सीट का इतिहास
आपको बता दें कि मरवाही सीट पर बीजेपी कभी भी जीत हासिल नहीं कर पाई है. यहां शुरुआत से ही जोगी परिवार का कब्जा रहा है. अजीत जोगी ने इसी सीट से जीत हासिल कर मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया था. जोगी इस सीट से लगातार 2003 और 2008 में जीत दर्ज करा चुके थे. 

ये भी पढ़ें: जोगी के गढ़ को जीत के लिए बीजेपी ने झोंकी ताकत, नियुक्त किए प्रभारी और सह-प्रभारी

2003 के चुनावों में अजीत जोगी ने 76,269 वोटों के साथ मरवाही विधानसभा सीट को अपने नाम किया था. जबकि उनके विपक्ष में खड़े बीजेपी के नंद कुमार साई को 22,119 वोट ही मिल सके. वहीं 2008 में जोगी ने फिर करीब 42 हजार के बड़े अंतर से जीत हासिल की. उनको जहां 67,522 वोट मिले तो वहीं भाजपा प्रत्याशी ध्यान सिंह को 25,431 वोट ही मिल सके. 

2013 में अजीत जोगी ने मरवाही में अपनी जगह बेटे अमित जोगी को दी. जिस पर खरे उतरते हुए अमित जोगी ने 82,909 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा को 36,659 वोट मिल सके. हालांकि 2018  का चुनाव खुद अजीत जोगी ने लड़ा और 45 हजार 395 वोटों के साथ जीत दर्ज की.  

WATCH LIVE TV: