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नोटिस के बाद भी BJP नेताओं का बंगलों पर कब्जा, 10 गुना ज्यादा किराया वसूलने की तैयारी

सीएम कमलनाथ सरकार के मंत्री और विधायक विश्राम गृह से काम चला रहे हैं तो कहीं अपने पुराने और छोटे सरकारी आवास में अफसरों के साथ बैठक कर रहे हैं.

नोटिस के बाद भी BJP नेताओं का बंगलों पर कब्जा, 10 गुना ज्यादा किराया वसूलने की तैयारी
मध्यप्रदेश में हुए चुनावी युद्ध में सरकार बदलने के बाद अब बंगला युद्ध शुरू हो गया है. (फाइल फोटो)

भोपाल (संदीप भम्मरकर): मध्यप्रदेश में हुए चुनावी युद्ध में सरकार बदलने के बाद अब बंगला युद्ध शुरू हो गया है. नई सरकार के नए मंत्रियों को रहने के लिए बंगले चाहिए लेकिन ये बंगले अभी भी शिवराज सरकार के मंत्रियों और कई दिग्गज नेताओं के कब्जे में हैं. गृह विभाग नोटिस तो थमा चुका है पर खाली करने में कई जगह आनाकानी की जा रही है. हालत ये है कि कमलनाथ सरकार के मंत्री कहीं विधायक विश्राम गृह से काम चला रहे हैं तो कहीं अपने पुराने और छोटे सरकारी आवास में अफसरों के साथ बैठक कर रहे हैं.

सभी बंगले चार इमली, 74 बंगले, 45 बंगले और श्यामला हिल्स की प्राइम कॉलोनीज़ में मौजूद हैं. गृह विभाग ने इन बंगलों को मंत्रियों की पसंद के मुताबिक आवंटित कर दिया है. कायदा तो ये कहता है कि इन सरकारी बंगलों को तुरंत खाली किया जाए, लेकिन ऐसा अब तक हुआ नहीं है. अब ये समझा जा रहा है कि आनाकानी हो रही है.

10 गुना ज्यादा किराया वसूलेंगे
गृह विभाग के अफसरों ने इन बंगलों पर नोटिस भी भेज दिए हैं, जिसके बाद बंगला खाली खत्म करने की मियाद भी खत्म हो चुकी है. कुछ नेता वक्त मांग रहे हैं तो कुछ जवाब देना भी ठीक नहीं समझ रहे. अब ऐसे नोटिस की तैयारी है, जिसके बाद भी बंगला नहीं खाली किया गया तो 10 गुना ज्यादा किराया वसूला जाएगा. यह भी पढ़ें: सीएम कमलनाथ की मुसीबतों का 'खलनायक' कौन, जो हाथों-हाथ सौंप रहा है बीजेपी को मुद्दे

कार्यवाही की जाएगी
गृहमंत्री बाला बच्चन का कहना है कि बंगले को खाली करने के नोटिस नियमानुसार भेजे जा चुके हैं. वहीं जो मंत्री जिस स्तर का बंगला डिजर्व करता है उसे वैसा बंगला आवंटित किया जा चुका है. सरकार के बंगला आवंटन और आवंटन रद्द करने के अपने नियम है. उस नियम के अनुसार कार्यवाही होगी. यदि किसी ने वक्त पर बंगला खाली नहीं किया तो उसके आगे की कार्यवाही की जाएगी.

कांग्रेसी सब्र रखें
इस मामले में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का कहना है कि कांग्रेसी भैराए हुए क्यों हैं. थोड़ा सब्र करना चाहिए. वो टेंट में थोड़ी ही रह रहे थे जो आनन-फानन बंगले की डिमांड कर रहे हैं. इसके जवाब में जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा जवाब में कहते हैं कि वो भी हमारे मित्र ही हैं. हम इंतज़ार कर लेंगे.

मंत्रियों के टारगेट पर ये इनके बंगले
शिवराज सरकार के वक्त परिवहन और गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह का बंगला जिसे व्हाइट हाउस कहा जाता है. इसी चार इमली इलाके में ही मौजूद राजेंद्र शुक्ला और नरोत्तम का बंगला, लिंक रोड जैसी रोड पर मौजूद कैलाश विजयवर्गीय का बंगला, श्यामला हिल में दिग्विजय सिंह, उमा भारती के बंगले वाली लाइन में मौजूद माया सिंह और विजय शाह के दो बड़े बंगले, 74 बंगले वाले इलाके में प्रभात झा के बंगले पर भी नजर है. प्रभात झा के साथ नंदकुमार सिंह चौहान, विक्रम वर्मा और राकेश सिंह का बंगला भी कमलनाथ के मंत्रियों के टारगेट पर हैं.

खास अहमियत रखते थे
हकीकत ये भी है कि प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह अब इतने बड़े बंगले के सरकारी दायरे में नहीं आते हैं. ये बंगले उन्हें इसलिए मिले थे क्योंकि बीजेपी सरकार के वक्त ये नेता खास अहमियत रखते थे.

रिनोवेशन पर काफी खर्चा
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह तो पूरे वक्त बीएचईएल के गेस्ट हाउस में ही ठहरते रहे. जब तक बंगला आवंटित हुआ सरकार ही चली गई. वे अपने सरकारी बंगले में पहुंच ही नहीं पाए, जबकि इसके रिनोवेशन के लिए लोक निर्माण विभाग ने काफी तामझाम के साथ खर्च किया था. इसके अलावा शिवराज के रत्नों में और भी ऐसे नेता शुमार थे जिन्होंने शानदार सरकारी बंगले अपने नाम आवंटित करा ऱखे थे. मसलन विधायक रामेश्वर शर्मा का विशालकाय बंगला जो 'युवा सदन' के नाम से जाना जाता है. बीजेपी नेता वीडी शर्मा भी चार इमली के बड़े बंगले में डटे हुए हैं.

इनको छोड़ना होगा बंगला
शिवराज सरकार में कद्दावर मंत्री रहे उमा शंकर गुप्ता अब चुनाव हार चुके हैं. लिहाजा उन्हें भी 45 बंगले स्थित दोनों बंगलों को छोड़ना पड़ेगा. जगदीश देवड़ा, मेघराज जैन, रंजना बघेल, अर्चना चिटनिस, लाल सिंह आर्य, जयभान सिंह पवैया, रुस्तम सिंह, कुसुम महदेले, गौरीशंकर शेजवार अब विधायक भी नहीं रहे इसलिए इन्हें भी अपने वीआईपी बंगले खाली करने पड़ेंगे. पारस जैन अब विधायक हैं इसलिए इन्हें अब बी टाइप बड़ा बंगला नहीं मिल सकता है. उन्हें विधायक के नाते छोटे बंगले से काम चलाना पड़ेगा और चार इमला वाला बंगला छोड़ना पड़ेगा.

शिवराज ने खाली किया
हालांकि कई बीजेपी नेता ऐसे भी हैं जो पहले ही बंगला खाली कर चुके हैं. शिवराज ने सबसे पहले सीएम हाउस तुरंत छोड़ दिया वे फिलहाल चौहत्तर बंगले स्थित अपने पुराने बंगले में शिफ्ट हैं. लेकिन अब वे कुछ दिनों बाद 9, सिविल लाइन में शिफ्ट होने जा रहे हैं. शिवराज इसके रिनोवेशन पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं. जिस बंगले में शिफ्ट होने जा रहे हैं उसकी कहानी भी किसी पुराने सियासी किले की कहानी की तरह दिलचस्प है. इस बंगले में किसी जमाने में मुख्यमंत्री रहा करते थे. ये सीएम हाउस कहलाता था. 1980 के पहले 11 मुख्यमंत्रियों ने यहां से सूबे पर राज किया. 1980 में जब अर्जुन सिंह सीएम बने तो वे सीएम हाउस को श्यामला हिल की ऊंची पहाड़ी पर मौजूद इस बंगले को सीएम हाउस में शिफ्ट किया जिस ऊंचाई से पुराने शहर से आसमान को झांकती मस्जिदों और झील का दिलकश नजारा दिखाई देता है.

सुषमा का बंगला अब शिवराज को
सीएम हाउस श्यामला हिल्स शिफ्ट हुआ तो भी इसका रुतबा-ओ-रुआब पर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा. यहां उपमुख्यमंत्री जैसे सियासत में दूसरे दर्जे वाले निजामी नेता का आशियाना रहा. जब उपमुख्यमंत्री नहीं रहे तब भी इसी दर्जे का रुतबेदार ही यहां रहता रहा. शिवराज से पहले ये बंगला केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज को आवंटित था. सुषमा जब दिल्ली से चुनाव लड़ने विदिशा पहुंचीa तो चुनाव जीतने के बाद शिवराज सरकार ने यही बंगला अलॉट किया था. अब उसमें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहेंगे.

बता दें कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अपने 10 साल के मुख्यमंत्री काल के आखिरी वक्त में पूर्व मुख्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का जीवन पर्यंत दर्जा देने का प्रावधान करके भोपाल में वीआईपी बंगले का मालिक बनाया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश के बंगलों को लेकर अदालती फरमान आया तो उसकी ज़द में एमपी भी आया. इसके बाद यहां भी मोतीलाल वोरा को आवंटित बंगला खाली करने का नोटिस भेज दिया. चुनाव से ऐन पहले दिग्विजय सिंह को भी अलॉट बंगला छीनकर उन्हें भोपाल में बेघर किया गया. कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया तो अब तक बंगले की बाट जोह रहे हैं और अपने भोपाल दौरे में होटल और सरकारी गेस्ट हाउस में ठहरने को मजबूर है.