बीमारी ने छीन ली आंखों से रोशनी फिर भी फैला रहे शिक्षा का प्रकाश, पिछले 13 साल से नहीं ली है छुट्टी

पिछले 13 साल से बिना किसी छुट्टी के लगातार अपनी जिम्मेदारियों को बाखूबी निभा रहे ओम प्रकाश अपने सराहनीय काम के लिए खबरों में छाए हुए हैं. 

बीमारी ने छीन ली आंखों से रोशनी फिर भी फैला रहे शिक्षा का प्रकाश, पिछले 13 साल से नहीं ली है छुट्टी
ओम प्रकाश (फोटो साभारः Zee News)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के कोदवा जिले के प्राथमिक स्कूल में असाध्य बीमारी से आंख की रोशनी खोने वाले शिक्षक ओम प्रकाश साहू बच्चों के जीवन में ज्ञान की दीपक जला रहे हैं. पिछले 13 साल से बिना किसी छुट्टी के लगातार अपनी जिम्मेदारियों को बाखूबी निभा रहे ओम प्रकाश अपने सराहनीय काम के लिए खबरों में छाए हुए हैं. बता दें कि आंख की रोशनी जाने के बाद भी ओम प्रकाश ने हार नहीं मानी और अपनी नौकरी को पूरी इमानदारी से करने का फैसला लिया. 

शिक्षक ओमप्रकाश ने दिव्यांगता को जीवन की बाधा मानकर निराश होने के बजाएं चुनौती मानकर जीने की बात कही है. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर दुर्ग बेमेतरा मार्ग पर बसे कोदवा प्राथमिक स्कूल के शिक्षक ओमप्रकाश नेत्रहीन होने के बाद भी दूसरे शिक्षकों की तरह रोजाना स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाते हैं. 

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बता दें कि ओमप्रकाश दुर्ग से बस से आने के बाद गांव के चौक से लोगों के सहयोग से स्कूल पहुंचते हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. ओम प्रकाश साहू जब 10वीं में थे तो उन्हें एक दौरा पड़ा था और फिर धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी. रेटिना की लाइलाज बीमारी होने के बाद भी ओम प्रकाश ने हार नहीं मानी. पत्राचार के माध्यम से 10वीं और फिर 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद ओम प्रकाश की नौकरी लग गई. 13 साल के उनके सराहनीय काम के लिए उन्हें दुर्ग रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है.