नक्सल प्रभावित इलाके का आदिवासी बेटा बनेगा डॉक्टर

गांव तक पहुंचने के लिए न तो सड़क है और न ही पीने के लिए पानी. गांव में बिजली की भी काफी समस्या है.

नक्सल प्रभावित इलाके का आदिवासी बेटा बनेगा डॉक्टर
हरीश पोडियामी

पवन शाह/सुकमा/नई दिल्लीः सुकमा जिला जो हमेशा से नक्सलवाद को लेकर सुर्खियों में रहा है, जिस जिले का शिक्षा का स्तर निम्न माना जाता रहा है, ऐसे में सुकमा जिले के बड़े केड़वाल गांव जैसे नक्सली हार्डकोर जोन से हरीश पोडियामी का MBBS के लिए चयन होना सुकमा जिले के लिए गौरव की बात है. बड़े केड़वाल गांव एक ऐसा गांव है जहां नक्सलियों के आतंक के चलते पुलिस फोर्स भी जाने से पहले कई बार सोचती है. गांव तक पहुंचने के लिए न तो सड़क है और न ही पीने के लिए पानी. गांव में बिजली की भी काफी समस्या है. सरकार की पहुंच अब भी इस गांव से कोसों दूर है. ऐसे में यहां से हरीश का MBBS के लिए चयन हरीश के परिवार के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है.

रायपुर में MBBS के लिए चयन
हरीश की प्रारंभिक पढ़ाई कक्षा 1-5 वीं तक बालक आश्रम गुट्टागुड़ा (रामपुरम) में हुई. वहां से चयनित होकर कक्षा 6 वीं से 10 वीं तक की पढ़ाई नवोदय विधालय कुम्हाररास सुकमा में की. 2015-16 में 89%के साथ 10वीं उत्तीर्ण कर  जवाहर नवोदय विधालय कवर्धा मे चयनित हुए और 2018 में हरीश ने 88.2% अंकों के साथ 12वीं पास की. इसके साथ ही हरीश बिना कोचिगं के नीट परीक्षा 2018 की बैच में एसटी (ST) कोटा में 80 वां रैंक प्राप्त कर पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविधालय रायपुर में MBBS के लिए चयनित हुआ.

गांव में नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं
हरीश ने बताया कि उसके प्राथमिक शिक्षा के दौरान छुट्टियों में वह जब अपने गांव जाता था तो वहां के लोगों को बीमारियों से जूझता देख उसे डॉक्टर बनने का ख्याल आया. जब कोई गांव में बीमार होता था तो उनको वहां उपचार नहीं मिल पाता था और जब तक पीड़ित को उपचार के लिए सुकमा, दोरनापाल या कोटा जैसे अस्पतालों में उपचार के ले जाया जाता तब तक पीड़ित रास्ते मे ही दम तोड़ चुका होता था. यह बात हरीश के दिल मे घर कर गई और हरीश ने अपना लक्ष्य निर्धारित कर अपने पढ़ाई में पूरा ध्यान लगाया और उसकी मेहनत रंग लाई.

पढ़ाई के लिए प्रशासन से मदद की उम्मीद
हरीश ने बताया कि उसने अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए काफी दिक्कतों का सामना किया है. पर उसने हमेशा चुनौतियो से लड़ने का रास्ता चुना, मुसीबतों से कभी डरा नहीं, हालांकि इन सबके बीच हरीश के परिवार की आर्थिक हालात काफी नाजुक रही. ऐसे में हरीश ने कहा है कि मेरी आर्थिक स्थिति के मद्देनजर मैं प्रशासन से मदद की उम्मीद करता हूं, अगर प्रशासन का पूरा सहयोग मिला तो मैं निश्चित ही उस मुकाम तक पहुंच जाऊंगा जो मेरा लक्ष्य है. वहीं दूसरी तरह हरीश का MBBS में चयन होने से उसके परिजन काफी खुश हैं. वे हरीश को बधाई देते हुए आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं देते हैं.