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MP: छतरपुर के इस स्टूडेंट ने बनाई ऐसी डिवाइस, छूने पर नहीं लगेगा बिजली का झटका

अपनी परिकल्पना को साकार रूप देने में आदित्य को 3 साल की कड़ी मेहनत करनी पड़ी. 

MP: छतरपुर के इस स्टूडेंट ने बनाई ऐसी डिवाइस, छूने पर नहीं लगेगा बिजली का झटका
आदित्य अपना ये मॉडल देश के लिए समर्पित करना चाहता है, जिसके लिए उसने पीएम नरेंद्र मोदी को मेल भी किया था.

हरीश गुप्ता/छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर के आदित्य ने एक ऐसे डिवाइस की खोज की है, जो बिना तारों के बिजली को एक जगह से दूसरे जगह तक पहुंचा देती है. इस खोज की खास बात ये है कि इसके संपर्क में आने पर बिजली के झटके नहीं लगते हैं. 11वीं क्लास में पढ़ने वाले आदित्य के बनाए गए इस मॉडल से देश में एक नई क्रांति लाई जा सकती है. आदित्य ने डिवाइस का नाम वायरलेस एंड शॉकलेस इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमीटर रखा है. आदित्य देश हित में कुछ ऐसा बनाना चाहता था, जो कहने और सोचने में नामुमकिन हो. आदित्य ने इस खोज पर काम करना शुरू किया, तो उसे देश में बिजली के करंट लगने से होने वाली मौतों का ख्याल आया और उसने ठान लिया कि वह एक ऐसा डिवाइस बनाएगा, जिससे लोगों को बिजली के झटके ना लगे. 

अपनी परिकल्पना को साकार रूप देने में आदित्य को 3 साल की कड़ी मेहनत करनी पड़ी. आखिरकार ऐसे मॉडल का आविष्कार कर लिया, जो बिना तारों के बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा देता है. आदित्य के इस अनोखे मॉडल में एक ट्रांसमीटर है, जो विद्युत तरंगों को भेजने का काम करता है. इन तरंगों को रिसीवर की सहायता से एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर किया जाता है. आदित्य को इस मॉडल को तैयार करने में 3 साल लगे. इस बीच कई बार उसे असफलता हाथ लगी. लेकिन उसने हार नहीं मानी. आदित्य अपना आदर्श पूर्व राष्ट्रपति और महान भारतीय वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के साथ आईन्स्टीन और न्यूटन को मानते हैं.

आदित्य अपना ये मॉडल देश के लिए समर्पित करना चाहता है, जिसके लिए उसने पीएम नरेंद्र मोदी को मेल भी किया था. अब आदित्य को भारत सरकार के सहयोग की जरूरत है. जिससे वह अपने मॉडल का विस्तार कर सके और देश में एक वायरलेस सिस्टम को चालू कर सके. इससे ना केवल देश में तारों पर होने वाले खर्च को बचाया जा सकेगा ,बल्कि बिजली की चपेट में आने वाले लोगों की भी जान बचाई जा सकेगी. 

आदित्य के परिजनों को विश्वास है कि मोदी सरकार आगे आकर उसके बेटे का पूरा सहयोग करेगी. परिजन एक ओर जहां अपने बेटे के अविष्कार से गर्व महसूस कर रहे हैं तो वहीं सरकार से आदित्य का सहयोग देने की मांग भी कर रहे है. आदित्य के टीचर भी उसकी इस कामयाबी का लोहा मान रहे हैं. उनका मानना है कि यदि उसे और सहयोग मिलता है तो वह इस काम में और आगे जा सकता है.