छत्तीसगढ़ चुनाव 2018: मस्तुरी में वापसी की कोशिश में जुटी BJP को कैसे मिलेगी जीत ?

मस्तुरी के लोगों के मुताबिक क्षेत्र में पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, बेरोजगारी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लोग काफी परेशान हैं.

छत्तीसगढ़ चुनाव 2018: मस्तुरी में वापसी की कोशिश में जुटी BJP को कैसे मिलेगी जीत ?
फाइल फोटो

बिलासपुरः छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की मस्तुरी विधानसभा सीट में जनता का पलायन हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, मस्तुरी के लोग क्षेत्र में फैली अव्यवस्था से काफी परेशान हैं, जिसके चलते राजनीतिक गलियारों में मस्तुरी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. मस्तुरी के लोगों के मुताबिक क्षेत्र में पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, बेरोजगारी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लोग काफी परेशान हैं. लोगों को हर रोज इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में मस्तुरी की जनता को न चाहते हुए भी अपना घर छोड़कर दूसरे प्रदेशों में नौकरी करना पड़ रहा है.

मस्तुरी विधानसभा सीट
मस्तुरी में 2003 और 2008 में जीत दर्ज करा चुकी भाजपा को 2013 के चुनावों में कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन क्षेत्र में फैली अव्यवस्थाओं के चलते चुनावी समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं और बाजी कहीं न कहीं भाजपा के हक में जाती दिख रही है. बता दें इस क्षेत्र में एसटी-एससी वर्ग का एक बड़ा धड़ा निवासरत है. ऐसे में किसी भी पार्टी की जीत इनके वोटों पर निर्भर करती है और यही कारण है कि मस्तुरी में सभी पार्टियां एसटी-एससी वर्ग को साधने में लगी हैं.

2003 विधानसभा चुनाव नतीजे
2003 में इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी कृष्णमूर्ती बांधी को इस मस्तुरी विधानसभा सीट पर जीत हासिल हुई थी. उन्होंने 40,485 वोटों के साथ कांग्रेस के मदन सिंह दहारिया को हराया था. मदन सिंह दहारिया को कृष्णमूर्ती बांधी की तुलना में 38,217 वोट मिले थे. 

2008 विधानसभा चुनाव नतीजे
बात करें 2008 के चुनाव की तो इस विधानसभा चुनाव में भी कृष्णमूर्ती बांधी ने ही बाजी मारी और 54,002 वोट हासिल कर कांग्रेस के मदन सिंह दहरिया को फिर से हराया. कृष्णमूर्ती की तुलना में मदन सिंह 44,794 वोट ही अपने नाम कर सके.

2013 विधानसभा चुनाव नतीजे
वहीं 2013 में कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बदलते हुए मदन सिंह दहारिया को टिकट न देकर दिलीप सिंह लहरिया को कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित किया और दिलीप सिंह ने कांग्रेस के इस फैसले पर खरा उतरते हुए भारी मतों से जीत हासिल की. 2013 के विधानसभा चुनाव में जहां दिलीप सिंह लहरिया को 86,509 वोट मिले तो वहीं पूर्व विधायक कृष्णमूर्ती बांधी को 62,363 वोट ही मिल सके.